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Meta और X के लिए भी चेतावनी, हाई कोर्ट सख्त
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : Delhi High Court ने टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि भारत सरकार के पास कानून के तहत ऐसे कदम उठाने का अधिकार है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि Information Technology Act 2000 सरकार को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी पूरे प्लेटफॉर्म या ऐप पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति देता है। ऐसे में टेलीग्राम पर अस्थायी बैन लगाने का निर्णय वैध दायरे में आता है। NEET परीक्षा के मद्देनज़र लगाया गया था बैन यह मामला NEET 2026 की पुनर्परीक्षा से जुड़ा है, जो 21 जून को आयोजित होनी है। पेपर लीक और फर्जी सामग्री के प्रसार की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने एहतियातन टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई थी। टेलीग्राम ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने सरकार के निर्णय को बरकरार रखा। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर सख्त संदेश अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत में काम करने वाले सभी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों से ऊपर नहीं हैं और उन्हें संविधान तथा कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा। टेलीग्राम पर पहले भी लगे हैं आरोप सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई बार पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्रों के प्रसार और अन्य अवैध गतिविधियों में हुआ है। साथ ही यह भी बताया गया कि प्लेटफॉर्म का उपयोग कुछ मामलों में आतंकवादी गतिविधियों और गैरकानूनी कारोबार के लिए भी किया गया है। अन्य प्लेटफॉर्म भी आ चुके हैं जांच के दायरे में इससे पहले WhatsApp को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आ चुके हैं। वर्ष 2024 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा व्हाट्सऐप पर जुर्माना लगाया गया था, जिसे कंपनी ने अदालत में चुनौती दी थी। कुल मिलाकर, हाई कोर्ट के इस फैसले को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है कि भारत में संचालन के लिए उन्हें स्थानीय कानूनों का सख्ती से पालन करना होगा।