स्थानीय निवासियों और जमीन मालिक के बीच आमने-सामने की स्थिति
जीरकपुर 03 Feb : बलटाना स्थित रविंद्र एन्क्लेव में मंगलवार दोपहर 35 फुट चौड़े रास्ते को लेकर विवाद गहरा गया। स्थानीय निवासियों और जमीन मालिक पक्ष के बीच रास्ते की स्थिति को लेकर करीब तीन से चार घंटे तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह रास्ता सरकारी नक्शे में 35 फुट चौड़ी सड़क के रूप में दर्ज है और वर्षों से लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि जमीन की सफाई कराने के बहाने अचानक रास्ते को बंद करने की कोशिश की गई, जिससे पूरे इलाके में परेशानी बढ़ गई। विवाद के दौरान स्थानीय महिलाओं ने भी खुलकर विरोध दर्ज कराया।
डिंपल, सुमन राणा, संगीता चौहान, शालू सैनी, सरिता, उर्मिला, कांता देवी, कोमल मेहता सहित अन्य महिलाओं ने कहा कि यदि जमीन मालिक को जेसीबी मशीन से सफाई करानी थी, तो इसकी सूचना पहले दी जानी चाहिए थी। बिना किसी पूर्व जानकारी के रास्ता बंद किए जाने से लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
वहीं, जमीन मालिक की ओर से देखरेख कर रहे केयरटेकर ने स्थानीय निवासियों के आरोपों को सिरे से खारिज किया। केयरटेकर ने दावा किया कि विवादित भूमि कोई सार्वजनिक या सरकारी रास्ता नहीं, बल्कि जमीन मालिक सीलम सोई की पुश्तैनी संपत्ति है। उन्होंने कहा कि करीब 15 दिन पहले ही स्थानीय लोगों को सूचित कर दिया गया था कि जमीन पर सफाई कार्य होना है और वहां से अपने वाहन हटा लें।
केयरटेकर ने बताया,
“हमने केवल अपनी जमीन की सफाई के लिए जेसीबी मशीन मंगवाई है। हमारे पास जमीन की फर्द, मालिकाना कागजात और जीपीएस के माध्यम से करवाई गई मैपिंग भी मौजूद है। यह जमीन पूरी तरह हमारे नाम पर दर्ज है और यहां किसी भी प्रकार का 35 फुट का सार्वजनिक रास्ता नहीं है। लोगों का विरोध बेबुनियाद है।”
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मौके से चुपचाप लौटे नगर परिषद के ड्राफ्टमैन, लोगों में रोष
विवाद के दौरान स्थानीय लोगों ने नगर परिषद की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। लोगों का आरोप है कि स्थिति बिगड़ती देख नगर परिषद के ड्राफ्टमैन पुनीत सिंगल को मौके पर बुलाया गया, लेकिन वह जनता की समस्या सुनने के बजाय जिम्मेदारी से बचते नजर आए। स्थानीय निवासियों के अनुसार ड्राफ्टमैन मौके पर पहुंचे जरूर, लेकिन करीब 50 मीटर दूर से ही हंगामा देखकर बिना किसी से बातचीत किए और बिना नक्शा या रिकॉर्ड स्पष्ट किए चुपचाप वापस लौट गए। इस रवैये से इलाके में भारी रोष फैल गया और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।
फिलहाल स्थिति शांत है, लेकिन स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सरकारी नक्शों और रिकॉर्ड की जांच कर रास्ते की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह का विवाद दोबारा न हो।