धेमाजी और लोअर सियांग के सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आर्थिक नाकेबंदी के दौरान सड़कों पर प्रदर्शन तेज हो गया और देखते ही देखते स्थिति पथराव तक पहुंच गई, जिससे दोनों राज्यों के बीच तनाव और गहरा गया।
धेमाजी (Naren Danu) : असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव लगातार गहराता जा रहा है। हालात तब और बिगड़ गए, जब आर्थिक नाकेबंदी के दौरान शिलापाथर-लीकाबली हाईवे पर प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव शुरू हो गया और देखते ही देखते मामला पत्थरबाजी तक पहुंच गया। इस दौरान पुलिस और सीआरपीएफ के जवान भी इसकी चपेट में आ गए।
विवाद की जड़ 10 अगस्त को हुई गोलीबारी की घटना को माना जा रहा है। धेमाजी जिले के गेरुकामुख थाना क्षेत्र के मिंगमांग गांव में सीमा विवाद को लेकर हुई फायरिंग में करीब 11 लोग घायल हो गए थे। आरोप है कि यह विवाद असम की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर शुरू हुआ था।
घटना के विरोध में टाकम मिसिंग पोरिन केबांग (टीएमपीके) ने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। इसके बाद दोनों राज्यों के बीच कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हो गया।
गुरुवार को शिलापाथर-लीकाबली मार्ग पर प्रदर्शन और उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंके, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए। सुरक्षा बलों को स्थिति नियंत्रित करने के लिए मौके पर तैनात किया गया।
टीएमपीके के साथ मिसिंग मिमाग केबांग और टाकम मिसिंग महिला केबांग ने गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। संगठनों का कहना है कि आरोपितों को असम पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए। इसके अलावा, सीमा विवाद का स्थायी समाधान निकालने और कथित अतिक्रमण को हटाने की मांग भी उठाई गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, आर्थिक नाकेबंदी के कारण अरुणाचल प्रदेश के पंजीकरण नंबर वाले वाहनों को कई प्रवेश बिंदुओं पर रोका जा रहा है। उल्लेखनीय है कि असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच 804.1 किलोमीटर लंबी सीमा है, जहां कई स्थान लंबे समय से विवाद का कारण बने हुए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि से बचने की अपील की है। दोनों राज्यों के अधिकारी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।