राज्य में बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। 50 राहत शिविरों में हजारों लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि कई राहत केंद्रों से जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जा रही है। बाढ़ से कृषि भूमि, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन पुनर्वास कार्यों को गति देने में जुटा है।
गुवाहाटी : असम अभी बाढ़ की मार से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि राज्य के कई हिस्सों में हालात फिर चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। नदियों का जलस्तर कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है, जबकि हजारों लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
राज्य सरकार ने राहत और पुनर्वास कार्यों को गति देने के लिए प्रभावित जिलों में मंत्रियों और अधिकारियों की समीक्षा बैठकें शुरू कर दी हैं। प्रशासन ने क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे 9 अगस्त से शुरू करने की तैयारी की है। प्रारंभिक राहत के तौर पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिजनों को 9 लाख रुपये की राहत राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
96 लोगों की मौत, 15 जिले अब भी बाढ़ की चपेट में
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 6 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, धनसिरि नदी (नुमलीगढ़) का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। वहीं राहत और बचाव अभियान के दौरान गुरुवार को गोलाघाट और उदालगुरी जिले में एक-एक शव बरामद किया गया। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 96 हो गई है।
फिलहाल राज्य के 15 जिले बाढ़ प्रभावित हैं। इनमें गोलाघाट, शिवसागर, उदालगुरी, कामरूप (मेट्रो), नगांव, कामरूप, दरंग, शोणितपुर, होजाई, लखीमपुर, बिश्वनाथ, जोरहाट, चराईदेव, कार्बी आंगलोंग और धेमाजी शामिल हैं।
इन जिलों के 39 राजस्व मंडलों के 481 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वर्तमान में 1,68,701 लोग प्रभावित हैं, जबकि 14,382.26 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।
50 राहत शिविरों में 10 हजार से अधिक लोग शरण लिए हुए
प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए 50 राहत शिविर और 83 राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। राहत शिविरों में 10,111 लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि 35,596 गैर-शिविर प्रभावित लोग राहत सामग्री प्राप्त कर रहे हैं।
बाढ़ से मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। अब तक 38 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त बताए गए हैं, जबकि शिवसागर जिले में दो पक्के मकानों के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 285 कच्चे मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
सेना से लेकर एनडीआरएफ तक राहत अभियान में जुटी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों में एसडीआरएफ, सेना, अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, वायु सेना, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्थानीय प्रशासन और प्रशिक्षित स्वयंसेवक लगातार जुटे हुए हैं।
बाढ़ के कारण कई स्थानों पर सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और हालात सामान्य करने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। सरकार का दावा है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार तक मदद पहुंचाने के लिए सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।