पीएम मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किए संस्कृत श्लोक में बताया कि चंद्रमा किसी प्रतिफल की इच्छा से प्रकाश नहीं देता, बल्कि यह उसका स्वभाव है। इसी प्रकार सज्जन व्यक्ति भी परोपकार को जीवन का स्वाभाविक गुण मानते हैं। श्लोक में मानव जीवन में सेवा, उदारता और दूसरों के कल्याण की भावना को सर्वोच्च महत्व दिया गया है।
नई दिल्ली (Naren Danu) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार सुबह अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सज्जनता और परोपकार की भावना को रेखांकित किया। उन्होंने संस्कृत के एक सुभाषित के जरिए बताया कि जिस प्रकार चंद्रमा बिना किसी अपेक्षा के अपनी किरणों से कुमुदिनी को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार महान और उदार हृदय वाले लोग स्वभाव से ही दूसरों के कल्याण में लगे रहते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा करते हुए लिखा—
“किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।
स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥”
इस सुभाषित का भावार्थ बताते हुए कहा गया कि चंद्रमा अपनी चांदनी से कुमुदिनी को खिलाने का कार्य किसी प्रत्युपकार या लाभ की इच्छा से नहीं करता, बल्कि यह उसका स्वाभाविक गुण है। इसी प्रकार उच्च विचारों वाले सज्जन व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के दूसरों की सहायता करते हैं, क्योंकि परोपकार उनके जीवन का स्वाभाविक हिस्सा होता है।
भवभूति की रचना से लिया गया श्लोक
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह सुभाषित महान संस्कृत कवि भवभूति की रचना माना जाता है। इसका उल्लेख रसिकलक्षण, रसिकजीवन, शाङ्गधरपद्धति और सुभाषितरत्नभाण्डागारम् जैसे ग्रंथों में मिलता है।
प्रधानमंत्री की नियमित सुभाषित श्रृंखला के तहत साझा किया गया यह संदेश भारतीय संस्कृति में निहित सेवा, करुणा और परोपकार के मूल्यों को उजागर करता है।