देश के नेताओं ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकर समुदाय के योगदान को याद करते हुए कहा कि हाथ से बुने वस्त्र भारत की पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं। केंद्रीय मंत्रियों ने हथकरघा क्षेत्र के संरक्षण, कारीगरों को नए अवसर देने और भारतीय शिल्प को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
नई दिल्ली (Naren Danu) : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को देशभर के बुनकरों और कारीगरों को सम्मान देते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने भारतीय हथकरघा परंपरा की सराहना की। नेताओं ने कहा कि हथकरघा केवल कपड़ा बनाने की कला नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी संस्कृति, आत्मनिर्भरता और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश जारी करते हुए कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा एक जीवंत विरासत है, जो कलाकारी, मजबूती और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी का प्रतीक है। उन्होंने बुनकरों और कारीगरों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि उनकी मेहनत न केवल इस अनमोल विरासत को जीवित रखती है, बल्कि ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने और टिकाऊ रोजगार उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाती है।
उन्होंने लोगों से हथकरघा उत्पादों को अपनाने, स्थानीय कारीगरों को समर्थन देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूत करने की अपील की।
हथकरघा भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक: बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देशभर के बुनकरों के श्रम और कौशल को नमन किया। उन्होंने कहा कि कोटा डोरिया जैसे उत्कृष्ट हथकरघा उत्पाद भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत पहचान हैं। उन्होंने नागरिकों से हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय बुनकरों के साथ खड़े होने का आह्वान किया।
हथकरघा आंदोलन से जुड़ी है आजादी की विरासत: शाह
केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है और यह देश की विविध संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हथकरघा परंपरा के संरक्षण और इसे नई पहचान देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की।
शाह ने कहा कि सरकार वैश्विक व्यापार समझौतों और घरेलू स्तर पर सहयोग के माध्यम से बुनकरों के लिए नए अवसर तैयार कर रही है, जिससे यह क्षेत्र और मजबूत हो रहा है।
हर हथकरघा बुनाई में बसती है भारत की आत्मा: गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्गमंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हर हथकरघा बुनाई में भारत की आत्मा बसती है। यह हुनर, परंपरा और पीढ़ियों के समर्पण से तैयार होती है। उन्होंने कहा कि हथकरघा कारीगर देश की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करने के साथ लाखों परिवारों की आजीविका का आधार बने हुए हैं।
हथकरघा लाखों परिवारों की जीवनरेखा: गिरिराज सिंह
केंद्रीय कपड़ामंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हथकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की उत्कृष्ट शिल्पकला, सांस्कृतिक विरासत और लाखों बुनकर परिवारों की जीवनरेखा है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक हथकरघा उत्पाद में बुनकरों के कौशल, मेहनत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की झलक दिखाई देती है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस भारतीय विरासत पर गर्व करने और बुनकरों के योगदान को सम्मान देने का अवसर है।
देशभर में मनाए जा रहे इस दिवस के जरिए सरकार और समाज ने एक बार फिर भारतीय हथकरघा परंपरा को संरक्षित करने, स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने और वैश्विक मंच पर भारतीय शिल्प की पहचान मजबूत करने का संकल्प दोहराया।