शराब ठेकेदार की शिकायत के बाद सीबीआई ने कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग और दस्तावेज वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेजकर कार्रवाई की सिफारिश की है। सूत्रों का दावा है कि ट्रैप की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन सफल नहीं हो सकी। आरोपों के बाद चंडीगढ़ पुलिस की जवाबदेही और भ्रष्टाचार नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चंडीगढ़ (अजीत झा) : चंडीगढ़ पुलिस एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है। मनीमाजरा थाना प्रभारी (एसएचओ) मनिंदर सिंह पर मोटर मार्केट स्थित एक शराब ठेकेदार से हर महीने ₹1 लाख नकद और दो पेटी विदेशी शराब की कथित मांग करने के आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग, पेन ड्राइव और बातचीत की ट्रांस्क्रिप्ट चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी और एसएसपी को भेजते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है।
मंथली बढ़ाने के बाद विवाद शुरू
सूत्रों के मुताबिक शिकायतकर्ता शराब ठेकेदार पहले भी कथित रूप से मासिक रकम देता था। आरोप है कि बाद में एसएचओ ने मंथली बढ़ाकर ₹1 लाख प्रतिमाह कर दी और साथ ही दो पेटी महंगी विदेशी शराब की भी मांग की। जब ठेकेदार ने इसे पूरा करने में असमर्थता जताई तो उसके बाद कथित तौर पर पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई।
बताया जा रहा है कि शराब के ठेके के बाहर पुलिस नाका लगवा दिया गया, जिससे ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने लगी। ठेकेदार का आरोप है कि उसे आर्थिक और प्रशासनिक दबाव में लाने का प्रयास किया गया। लगातार परेशानी के बाद उसने सीबीआई से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
सीबीआई ने की रिकॉर्डिंग, ट्रैप की भी बनाई योजना
सूत्रों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग की और ट्रैप की योजना बनाई। हालांकि निर्धारित समय पर शिकायतकर्ता रकम लेकर नहीं पहुंच पाया, जिसके कारण ट्रैप सफल नहीं हो सका। इसके बावजूद एजेंसी ने अपने पास उपलब्ध कथित रिकॉर्डिंग, पेन ड्राइव और बातचीत की ट्रांस्क्रिप्ट वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेज दी।
बताया जा रहा है कि सीबीआई के डीआईजी स्तर के अधिकारी ने करीब 15 दिन पहले डीजीपी और एसएसपी को पत्र लिखकर मामले में आवश्यक विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश भी की थी।
15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, उठ रहे सवाल
सूत्रों का दावा है कि कथित साक्ष्य भेजे जाने के बावजूद अब तक संबंधित एसएचओ मनिंदर के खिलाफ कोई सार्वजनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। इसे लेकर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस महकमे में चर्चा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएचओ को लाइन हाजिर किए जाने की तैयारी चल रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
भ्रष्टाचार के मामलों से पहले भी घिर चुकी है चंडीगढ़ पुलिस
पिछले कुछ महीनों में चंडीगढ़ पुलिस के कई अधिकारी सीबीआई की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। हाल ही में बापूधाम पुलिस चौकी के तत्कालीन इंचार्ज इंस्पेक्टर सुरेश कुमार और एएसआई भगत सिंह को कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 31 मार्च 2026 को सेक्टर-26 सब्जी मंडी के बीट इंचार्ज हेड कांस्टेबल सुनील यादव तथा 6 जून 2026 को सेक्टर-39 के तत्कालीन एएसआई हितेश कुमार भी रिश्वत के मामलों में सीबीआई के शिकंजे में आ चुके हैं।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने चंडीगढ़ पुलिस की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मनीमाजरा एसएचओ के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो यह पुलिस विभाग के लिए एक और बड़ा झटका माना जाएगा।