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लुधियाना, 27 जून : नॉर्वे की 'नॉर्दर्न लाइट्स ट्रेन’ ने दुनिया भर में रेल पर्यटन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। आर्कटिक क्षेत्र की बर्फीली वादियों के बीच चलने वाली यह विशेष ट्रेन यात्रियों को अंधेरे पहाड़ी इलाकों में ले जाती है, जहां आसमान में चमकती **ऑरोरा बोरेलिस** यानी नॉर्दर्न लाइट्स देखने का अवसर मिलता है। यह सफर नॉर्वे की ऐतिहासिक रेल लाइन से होकर नारविक क्षेत्र, ब्योर्नफ्येल और कैटेराट जैसे खूबसूरत इलाकों तक जाता है। कैटेराट स्टेशन सड़क मार्ग से अलग और कम रोशनी वाला क्षेत्र माना जाता है, इसलिए यहां नॉर्दर्न लाइट्स देखने की संभावना बेहतर रहती है। नॉर्वे के इस पर्यटन मॉडल ने भारत में भी नई उम्मीदें जगा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दार्जिलिंग, पूर्वोत्तर राज्यों और लेह-लद्दाख जैसे पहाड़ी व पर्यटन क्षेत्रों में इस तरह की थीम आधारित विशेष ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। ऐसी ट्रेनें यात्रियों को सिर्फ मंजिल तक पहुंचाने का साधन नहीं होंगी, बल्कि सफर को यादगार अनुभव में बदल देंगी। लोगों को उम्मीद है कि **केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू**, जिन्होंने अपने छोटे कार्यकाल में ही सक्रिय और प्रभावी कार्यशैली से अच्छा प्रभाव छोड़ा है, इस दिशा में भी गंभीर प्रयास करेंगे। आम लोगों और पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में प्राकृतिक सुंदरता वाले क्षेत्रों को रेल पर्यटन से जोड़ना समय की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी ट्रेनें शुरू होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, होटल कारोबार, टैक्सी सेवा, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। भारत में रेल यात्रा करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ी है। यदि इसे पर्यटन और अनुभव से जोड़ा जाए, तो यह देश के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।