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डिलिवरी के बाद मां-बच्चे की मौत, - Uturn Time
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नवजात को मनहूस बता पिता छोड़ गया लाश, दादा-दादी पहुंचे तो खूब रोए
नवीन गोगना लुधियाना 5 फरवरी /युटर्न : सिविल अस्पताल में दो दिन के मासूम की मौत के कई दिन बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया। नवजात का पिता उसे लेने नहीं आया, जबकि बच्चे के दादा-दादी अस्पताल पहुंचे। बच्चे की हालत देख वह खूब रोए और उन्होंने हिंदू रीति रिवाज के अनुसार नवजात को अंतिम विदाई दी। दरअसल बच्चे के पैदा होने के दो दिन बाद उसकी मां की मौत हो गई। उसके अगले दिन नवजात भी इस दुनिया को अलविदा कर गया। वहीं नवजात के पिता ने बच्चे को मनहूस बताते हुए उसका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया और अस्पताल से पत्नी का शव लेकर चला गया। पिछले एक महीने से शव सिविल अस्पताल की मार्चरी में पड़ा था। अस्पताल प्रशासन ने इसकी जानकारी पुलिस को दी और पुलिस ने पिता का काफी ढूंढा लेकिन वह नहीं मिला। वहीं पुलिस को नवजात के दादा-दादी का पता मिल गया। उन्हें सिविल अस्पताल बुलाया गया और बच्चे का शव उन्हें सौंपा गया। बच्चे के शव की हालत देख वह भी फूट-फूट कर रोए और उन्होंने रीति रिवाजों के साथ बच्चे के शव को दफनाया। जानकारी के अनुसार दिसंबर 2025 में ममता नाम की महिला को उसके पति बनारसी दास ने सिविल अस्पताल में दाखिल कराया था। ममता मूल रूप से बिहार के जिला सहारण की रहने वाली थी और यहां जंडियाली इलाके में किराए के मकान में पति रहती थी। 31 दिसंबर को उसकी प्री मच्योर डिलिवरी हुई। बच्चा उस समय पूरी तरह से स्वस्थ था, लेकिन उसके फेफड़े कमजोर थे। पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह उसका इलाज करा सके। हालांकि डॉक्टरों ने पहल के आधार पर बच्चे को इलाज के लिए निरानी में रखा हुआ था। दो दिन इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। अगले ही दिन बच्चे की मां ममता (काल्पनिक नाम )की भी मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल के स्टाफ ने बनारसी दास (काल्पनिक नाम ) को इसकी जानकारी दे दी। क्रूर पिता ने पत्नी की मौत का जिम्मेदार उस मासूम को बताया। वह पत्नी का शव तो ले गया, लेकिन दो दिन के मासूम का शव वहीं छोड़ कर चला गया। सिविल अस्पताल के डॉ. रोहित रामपाल के मुताबिक जब पिता बच्चे को लावारिस छोड़ गया था तो शव मोर्चरी में रखवा दिया था। इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने बनारसी दास के बारे में काफी पता किया, लेकिन पता नहीं चल पाया। कहीं से उसके परिवार का पता चला तो पुलिस ने संपर्क किया। बिहार से उसके दादा-दादी को बुलवाया गया। सारी बात बताई गई तो वह भी रोने लगे। पुलिस ने बच्चे का शव दादा-दादी को सौंपा और वह रीति रिवाजों के साथ शव दफना कर चले गए।