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लुधियाना | 28 जनवरी : असंख्य उद्योगिक संस्थाओं ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के ऐतिहासिक समझौते का जोरदार स्वागत किया है। एक्सपर्ट्स की माने तो आगामी भविष्य का अंदाजा इसी से चल सकता है की वर्तमान समय में भारतीय इकोनॉमी 4 .5 ट्रिलियन की है जबकि ग्लोबल जीडीपी के 25 % अनुसार फता की वैल्यू 28 ट्रिलियन बन रही है। साफ़ शब्दों में कहे तो अभी भारत में इतने बड़े FTA के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर ही उपलब्ध नहीं है फिर भी ऐसे FTA का होना किसी सुनहरी ख्वाब से कम नहीं है। 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में घोषित यह करार भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग के लिए एक परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है। भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने : सिद्धार्थ खन्ना NITMA के प्रधान सिद्धार्थ खन्ना ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में सहयोग करेगा । साथ ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह तथा उनके मंत्रालयों के अधिकारियों की “संतुलित और न्यायसंगत” समझौता सुनिश्चित करने हेतु सराहना की है। खन्ना ने एक और अहम मुद्दे पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि भारत-आसियान एफटीए में ड्यूटी असंतुलन बना हुआ है, जहां कच्चे पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर (HS 55032000) पर 5.5% बेसिक कस्टम ड्यूटी है, जबकि तैयार पॉलिएस्टर स्पन यार्न (HS 55092100) ड्यूटी-फ्री आयात होता है। इससे आयात 8.4 मिलियन किलो से बढ़कर 82.7 मिलियन किलो तक पहुंच गया है, जिससे भारतीय मिलों को नुकसान हो रहा है। NITMA ने दोनों एचएसएन कोड पर समान शुल्क की मांग की है। यूरोप में जीरो-ड्यूटी एक्सेस से गारमेंट इंडस्ट्री को मिलेगा बूस्ट : दर्शन गाबा लुधियाना रेडीमेट गारमेंट्स एसो( अलारजीएमए) संस्था के चेयरमैन दर्शन गाबा ने कहा की करीब दो दशकों की बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह एफटीए तय हुआ है, जिसके तहत भारतीय निर्यातकों को यूरोप में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करता है और ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सोर्सिंग पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं। भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर के लिए बन सकती है संजीवनी : राजीव गर्ग निटत्मा के पूर्व प्रेजिडेंट राजीव गर्ग ने कहा की यूरोपीय संघ भारत के लिए वस्त्र और परिधान का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ईयू का कुल आयात लगभग 263.5 अरब डॉलर का है। एफटीए के तहत 12 प्रतिशत तक के शुल्क हटने से भारतीय निर्यातकों को बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मिल रहे चेलेंज न्यूनतम होंगे। मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर के लिए के लिए गेम-चेंजर : जिंदल ग-१३ बाइसाइकिल फोरम के प्रधान राजिंदर जिंदल ने कहा,“भारत-ईयू एफटीए भारतीय इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर के लिए के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ इन्वेस्टमेंट ,इनोवेशन ,टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ,स्थिरता और यूरोपीय बाजार की मांगों के अनुरूप गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।” टेक्सटाइल सेक्टर को प्रमुख लाभ : थापर निटवियर क्लब के चेयरमैन विनोद थापर ने कहा की एफटीए के तहत सभी टेक्सटाइल टैरिफ लाइनों पर जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे गारमेंट्स, कॉटन और एमएमएफ टेक्सटाइल जैसे प्रमुख सेगमेंट को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इससे देश के 342 जिलों और प्रमुख क्लस्टरों को ऊर्जा मिलेगी और करीब 4.5 करोड़ लोगों की आजीविका को समर्थन मिलेगा। सिर्फ शुल्क कटौती तक सीमित नहीं FTA : भवरा फास्टनर मैन्युफैचरिंग एसो के प्रधान नरेंदर भावरा ने कहा की FTAसमझौता सिर्फ शुल्क कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाने, कस्टम्स सुविधा, निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ईयू मानकों के अनुरूप ‘ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग’ को भी प्रोत्साहित करेगा। फोर्जिंग ,इंजिनयरिंग और ऑटो पार्ट्स सैक्टर को मिलेगी नई उड़ान : आहूजा अपैक्स चेंबर के प्रधान रजनीश आहूजा ने कहा की उम्मीद है की भारत-ईयू एफटीए के साथ-साथ यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ हुए हालिया समझौते भारत को एक सस्टेनेबल और भरोसेमंद वैश्विक सोर्सिंग पार्टनर के रूप में स्थापित करेंगे और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूती देंगे। फोर्जिंग ,इंजिनयरिंग और ऑटो पार्ट्स सैक्टर को नई उड़ान मिल सकती है।