राष्ट्रीय पुस्तकालय में बना आधुनिक डिजिटल संग्रहालय, 22 भारतीय भाषाओं, लिपियों और साहित्यिक परंपराओं की दिखाई जाएगी यात्रा
कोलकाता (Naren Danu) : भारत की भाषाई विविधता और साहित्यिक विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में देश के पहले ‘शब्द संग्रहालय’ (म्यूजियम ऑफ वर्ड) का उद्घाटन किया। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पुस्तकालय द्वारा विकसित यह संग्रहालय भारतीय भाषाओं, लिपियों और साहित्य की समृद्ध परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत करेगा।
उद्घाटन समारोह में अमित शाह ने कहा कि भाषा किसी भी राष्ट्र की पहचान, संस्कृति और इतिहास का आधार होती है। उन्होंने कहा कि किसी देश की सभ्यता और उसके मूल्यों को समझने के लिए उसकी भाषा और साहित्य को जानना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा के साथ कम से कम एक अन्य भारतीय भाषा सीखने का आह्वान किया।
भाषा से जुड़ी विरासत को मिलेगा नया मंच
गृह मंत्री ने कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होते, बल्कि वे ज्ञान और विचारों के केंद्र होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी देश की प्रगति इस बात से भी तय होती है कि वहां कितने लोग पुस्तकालयों से जुड़कर पढ़ने की संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में देश को कई महान व्यक्तित्व दिए हैं।
डिजिटल तकनीक से सजेगा भाषाओं का सफर
‘शब्द संग्रहालय’ को पारंपरिक संग्रहालय की जगह एक आधुनिक अनुभवात्मक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां डिजिटल डिस्प्ले, होलोग्राम, मोशन सेंसर और अन्य तकनीकों के माध्यम से आगंतुक भारतीय भाषाओं के विकास और इतिहास को करीब से समझ सकेंगे।
संग्रहालय में कुल नौ दीर्घाएं बनाई गई हैं, जिनमें भारतीय भाषाओं की उत्पत्ति, विभिन्न लिपियों का विकास, साहित्यिक परंपराएं और भारतीय सभ्यता पर भाषाओं के प्रभाव को प्रदर्शित किया गया है।
22 अनुसूचित भाषाओं की दिखाई जाएगी यात्रा
इस संग्रहालय में भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं की समृद्ध विरासत को प्राचीन मौखिक परंपराओं, पांडुलिपियों, मुद्रित साहित्य और डिजिटल युग तक की यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य देश की भाषाई विविधता को संरक्षित करना, नई पीढ़ी को भारतीय भाषाओं से जोड़ना और भाषा को जीवंत सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित करना है।