चंडीगढ़/यूटर्न/20 जुलाई। संसद के मॉनसून सेशन के पहले दिन सोमवार को हाई ड्रामा देखने को मिला, जब हज़ारों छात्रों और युवाओं के सपोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्यों ने बार-बार परीक्षा के पेपर लीक होने को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। साथ ही, विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। पूरे सेंट्रल दिल्ली में भारी सुरक्षा तैनात की गई थी, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और रोक लगा दी थी। जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की तो झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना पड़ा।
देशव्यापी अभियान का केंद्र बना
क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन, बार-बार होने वाली परीक्षा में गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग करने वाले देशव्यापी अभियान का केंद्र बन गया है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र पर कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं की ईमानदारी की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया और शिक्षा क्षेत्र में सिस्टमिक सुधारों की मांग की। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पंजाब समेत कई राज्यों के स्टूडेंट ग्रुप प्रदर्शन में शामिल हुए। उनका आरोप था कि बार-बार लीक होने से सरकारी नौकरियों और प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी कर रहे लाखों कैंडिडेट के सपने टूट गए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए नारे
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए, हाथों में प्लेकार्ड लिए हुए थे जिन पर भर्ती में ट्रांसपेरेंसी और पेपर लीक रैकेट को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग थी। उन्होंने हाल के एग्जाम स्कैंडल की टाइम-बाउंड जांच और कॉम्पिटिटिव टेस्ट कराने वाले अधिकारियों की ज़्यादा जवाबदेही तय करने की भी मांग की। कई लोगों ने कहा कि एग्जाम बार-बार कैंसिल होने से उन स्टूडेंट्स पर भारी फाइनेंशियल और इमोशनल बोझ पड़ा है जो इन टेस्ट की तैयारी में सालों लगाते हैं।
सरकार ने आंदोलन तक फॉर्मल पहुंच शुरु की
जैसे-जैसे आंदोलन तेज हुआ, सरकार ने आंदोलन तक अपनी पहली फॉर्मल पहुंच शुरू की। भाजपा प्रेसिडेंट और यूनियन हेल्थ मिनिस्टर जे.पी. नड्डा ने सीजेपी के दो मेंबर वाले डेलीगेशन से बातचीत की, जिससे प्रदर्शनकारियों से बात करने की इच्छा का संकेत मिला। हालांकि, सीजेपी ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार कथित नाकामियों की जिम्मेदारी नहीं ले लेती और प्रधान के इस्तीफे समेत अपनी मुख्य मांगों पर कार्रवाई नहीं करती।
मॉनसून सेशन हंगामेदार रहने की उम्मीद
मॉनसून सेशन के हंगामेदार रहने की उम्मीद है, क्योंकि विपक्ष भी एग्जाम लीक और दूसरे विवादित मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। संसद शुरू होने के बाद भी विरोध प्रदर्शन सड़कों पर हैं, इसलिए आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में छा सकता है और देश के एग्जाम सिस्टम की विश्वसनीयता पर बढ़ती चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है।
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