चार्जशीट के ऑर्डरों के बावजूद जोन-ए में सेवाए दे रहे है इंस्पेक्टर मक्कड़
लुधियाना/यूटर्न/15 जुलाई। लुधियाना नगर निगम जोन-बी के अधीन आते सुंदर नगर इलाके की बिल्डिंग का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। दो दिन पहले ही बिल्डिंग ब्रांच के इंस्पेक्टर दिलीप कुमार सोनी को सस्पेंड किया गया। चर्चा है कि उन पर सुंदर नगर में अवैध बहुमंजिलां बिल्डिंग बनवाने के मामले में कार्रवाई हुई है। अब इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए है। चर्चा है कि इस बिल्डिंग को बनवाने में असली खेल इंस्पेक्टर दिलीप कुमार सोनी द्वारा नहीं बल्कि किसी और अधिकारी ने किया था। कांग्रेस पार्षद अरुण शर्मा ने आरोप लगाए कि खेल करने वाले अधिकारियों द्वारा बिल्डिंग बनवाने को लाखों रुपए लिए थे। निर्माण कार्य पूरा भी हो गया। लेकिन इस बीच ब्लॉक का चार्ज सोनी के पास आ गया और वह भी मौके पर पहुंच गए। जिसके बाद मामला बढ़ गया। हालाकि इस मामले में उक्त लाखों रुपए में कई अफसरों को हिस्सा मिलने की चर्चाए है। इस संबंधी मिलीभगत करने वाले अफसरों के नाम समेत एक एफिडेविट उच्च अधिकारियों को दिया गया है। निगम हाउस मीटिंग में यह मुद्दा गरमा सकता है। पूरे मामले में किंगपिन कोई और है, पैसों की बंदरबाँट किसी और में हुई और बली का बकरा कोई और बन गया। अब उन अफसरों के नामों को लेकर शहर में चर्चा छिड़ी हुई है। बेशक इंस्पेक्टर सोनी बली का बकरा बने। लेकिन उनके ख़िलाफ़ भी कई शिकायतें अधिकारियों के पास पहुंची थी।
कई सीलें खुलवा चुका बाहुबली अधिकारी
चर्चा है की जिस अधिकारी ने बिल्डिंग बनवाने में किंगपिन के तौर पर भूमिका निभाई वे पहले जोन-ए में एटीपी नियुक्त रह चुके है। हालाकि बाद में उनका तबादला हो गया। लेकिन अब दोबारा चार्ज मिलते ही उन्होंने सबसे पहले भदौड़ हाउस वाली बिल्डिंग की सील खुलवाई। जिसमें सील खोलने का आरोप पूर्व महिला कमिश्नर पर लगाया। अब यह तो महिला कमिश्नर और उक्त अधिकारी ही बता सकते है की आखिर किसके दबाव में सील खोली गई थी। उक्त अफसर ने अपनी छत्रछाया में पुरानी कोतवाली में बिना रोकटोक बेसमेंट सहित पाँच मंज़िलां बिल्डिंग बनवाई और चाँद सिनेमा रोड पर मरवाहा मेन्स वियर का इलीगल शोरूम बनवाया। इस अधिकारी के कारनामों को बिल्डिंग ब्रांच के उच्च अधिकारी भी अच्छे से वाक़िफ़ है। लेकिन बस आपसी सहमति के चलते हमेशा मामले दबाए जाते है।
बंदरबांट में एक और नामी अधिकारी शामिल
वहीं चर्चा है कि उक्त बिल्डिंग निर्माण में किंगपिन तो पूर्व एटीपी थे, जबकि उस समय चार्ज किसी और विवादित इंस्पेक्टर के पास था। उक्त पूर्व एटीपी ने बिचौला बनकर इंस्पेक्टर और बिल्डिंग मालिक का समझौता कराया। जिसके बाद पैसों की बंदरबांट हुई। चर्चा है कि पैसों की इस बंदरबांट में एक राजनेता भी शामिल है। राजनेता के पूर्व करीबी द्वारा एक वीडियो जारी कर उक्त इंस्पेक्टर द्वारा राजनेता को पैसा पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए थे। पार्षद अरुण शर्मा अनुसार चर्चा है कि उक्त अधिकारी ने सुंदर नगर की अवैध बिल्डिंग अकेले अपने दम पर नहीं बनवाई, बल्कि कई उच्च अधिकारियों की मिलीभगत थी। अब शोर पड़ने पर सभी फ़सने की कगार पर है। जल्द ही इन अफ़सरों के नाम से पर्दा उठेगा।
सोनी पर पहले भी लग चुके गंभीर आरोप
बेशक इस मामले में इंस्पेक्टर दिलीप सोनी का रोल कम बताया जा रहा है, लेकिन कई और मामलों में उन पर गंभीर आरोप लगे थे। उन पर जोन-सी अधीन लोहा मार्केट में एक फर्म की इमारत गलत कंपाउंड करने के आरोप लगे। ब्लॉक-21 के न्यू जनता नगर के रिहायशी एरिया में कमर्शियल इमारत कंपाउंड की। लोहारा में एक अवैध स्कूल बनवाने के मामले में नोटिस जारी हुआ। रमन स्टील फर्म की गलत कंपाउंडिंग का मामला पूर्व कमिश्नर तक पहुंचा था। उन्होंने एमटीपी, एटीपी व इंस्पेक्टर को बुलाकर झाड़ लगाई थी। इसके बाद पूर्व कमिश्नर ने इंस्पेक्टर सोनी खिलाफ एक्शन के लिए लोकल बॉडी सेक्रेटरी को लिखा था। जनकपुरी में भी पांच अवैध दुकानों को नोटिस जारी कर कार्रवाई नहीं की।
चार्जशीट के बावजूद सेवाए दे रहे इंस्पेक्टर मक्कड़
पूर्व कमिश्नर डॉ. नीरू कत्याल द्वारा इंस्पेक्टर हरमिंदर सिंह मक्कड़ ख़िलाफ़ भी विभागीय कार्रवाई शुरू की थी। उन्हें अवैध निर्माण को बढ़ावा देने और कार्रवाई न करने पर चार्जशीट करने के आदेश हुए। कमिश्नर का तबादला होने पर एक महीने से कार्रवाई बीच में लटकी है। इंस्पेक्टर मक्कड़ पर इतने गंभीर आरोप है। जिसके बावजूद वह निगम जोन-ए में बतौर इंस्पेक्टर अपनी सेवाए दे रहे है। लोगो का कहना है की अगर एक अधिकारी पर पहले ही अवैध निर्माण के आरोप लगे है तो वह आगे कैसे ईमानदारी से काम करेगा। चर्चा है कि उच्च अफसरों के साथ उनकी अच्छी बॉन्डिंग है।
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