वन्य जीवों की सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण को ध्यान में रखकर फैसला, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद लिया गया निर्णय
चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : पंजाब में बाढ़ नियंत्रण और नदियों के बेहतर प्रबंधन को लेकर राज्य वन्य जीव बोर्ड की स्थायी समिति ने अहम फैसला लिया है। वन एवं वन्य जीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक्क की अध्यक्षता में हुई बैठक में ब्यास और रावी दरिया में डी-सिल्टिंग (गाद व रेत हटाने) के 7 प्रस्तावों को मंजूरी के लिए नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की स्थायी समिति को भेजने की सिफारिश की गई है।
बैठक में जल संसाधन विभाग की ओर से पिछले वर्ष आई बाढ़ के कारण नदियों में जमा हुई सिल्ट और रेत को हटाने संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन कार्यों का उद्देश्य बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बेहतर बनाना है।
बैठक में फैसला लिया गया कि ब्यास दरिया में होशियारपुर जिले की 2, कपूरथला की 3 और गुरदासपुर की 1 साइट पर डी-सिल्टिंग के प्रस्ताव आगे भेजे जाएंगे। इसके अलावा रावी दरिया में कथलोर-कुशलिया वन्य जीव सेंचुरी से सटी एक साइट पर भी डी-सिल्टिंग की सिफारिश की गई है।
वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए हुआ वैज्ञानिक अध्ययन
अधिकारियों के अनुसार, ब्यास दरिया कंजर्वेशन रिजर्व होने के साथ-साथ रामसर साइट भी है। यहां डॉल्फिन, घड़ियाल समेत कई महत्वपूर्ण जलीय जीव पाए जाते हैं। ऐसे में डी-सिल्टिंग के दौरान वन्य जीवों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए आईआईटी रोपड़ से अध्ययन करवाया गया था।
जल संसाधन विभाग की ओर से ब्यास दरिया की करीब 30 साइटों पर डी-सिल्टिंग का प्रस्ताव भेजा गया था। आईआईटी रोपड़ की रिपोर्ट के बाद विशेषज्ञ समिति ने सभी साइटों का निरीक्षण किया और इनमें से केवल 6 साइटों पर डी-सिल्टिंग की सिफारिश की।
विशेषज्ञ समिति के अनुसार, इन स्थानों पर अत्यधिक सिल्ट जमा होने से नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ है और वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास पर भी असर पड़ा है। डी-सिल्टिंग से जहां बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी, वहीं नदी की गहराई बढ़ने से जलीय जीवों के लिए भी बेहतर वातावरण तैयार होगा।
बैठक में प्रशासनिक सचिव (वन) कमल किशोर यादव, प्रमुख मुख्य वन पाल धर्मिंदर शर्मा, मुख्य वन्य जीव वार्डन सतिंदर सागर, वन विभाग, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।