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67 नेताओं से रायशुमारी में नेतृत्व बदलने की मांग का दावा, फैसले के बाद पार्टी में नाराजगी; चन्नी की ताकत पर कांग्रेस के भीतर ही उठे सवाल
चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब के राजनीतिक हालात का आकलन करने के लिए कांग्रेस हाईकमान द्वारा गठित तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर पैनल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद हाईकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला लिया, जिससे पार्टी के एक वर्ग में नाराजगी बढ़ गई है। तीन सदस्यीय पैनल ने तैयार की थी रिपोर्ट सूत्रों के मुताबिक, अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव की सदस्यता वाले ऑब्जर्वर पैनल ने पंजाब के संगठनात्मक हालात पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस नेतृत्व को सौंपी। इस दौरान नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर यह जानने की कोशिश की गई कि विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की जरूरत है या नहीं। 67 वरिष्ठ नेताओं से ली गई राय बताया जा रहा है कि पैनल ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्यों, पूर्व मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, जिला कांग्रेस अध्यक्षों (DCC) और अन्य वरिष्ठ नेताओं सहित करीब 67 नेताओं से बातचीत की। वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी से भी उनके आवास पर मुलाकात कर राय ली गई। सूत्रों का दावा है कि अधिकांश नेताओं ने राजा वड़िंग के कार्यकाल को लेकर असंतोष जताया और प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी चरणजीत सिंह चन्नी को सौंपने की वकालत की। रिपोर्ट में चन्नी को पार्टी का सबसे लोकप्रिय चेहरा बताए जाने की भी चर्चा है। हाईकमान के फैसले से बढ़ी नाराजगी रिपोर्ट सामने आने के बाद चन्नी समर्थकों को नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीद थी, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने संगठन में कोई बदलाव नहीं किया। राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा गया, जबकि चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि नेतृत्व बदलने का इरादा नहीं था तो नेताओं से राय लेने की प्रक्रिया का कोई औचित्य नहीं था। उनके मुताबिक इससे कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। चन्नी की पकड़ पर भी उठे सवाल वहीं कांग्रेस के दूसरे धड़े का मानना है कि चन्नी लोकप्रिय जरूर हैं, लेकिन संगठन पर उनकी पकड़ को लेकर अभी भी सवाल हैं। एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, चन्नी लगातार नेताओं से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनकी बैठकों में अपेक्षित संख्या में विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हो रहे। उनका कहना है कि आगामी दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि पार्टी के भीतर किस नेता के साथ कितना समर्थन है। चुनाव से पहले बढ़ सकती है चुनौती प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जारी यह असंतोष विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए नई चुनौती बन सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि हाईकमान संगठन में संतुलन कैसे बनाए रखता है और नाराज नेताओं को किस तरह साधता है।