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Chandigarh: पंजाब कैबिनेट का बड़ा फैसला, जमीन मालिकों को मिलेंगे अधिक प्लॉट और कई नई राहतें - Uturn Time
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लैंड पूलिंग और आउस्टी नीति में संशोधन मंजूर; छोटे किसानों को विशेष राहत, स्टांप ड्यूटी में भी छूट
चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में जमीन मालिकों और किसानों को राहत देने के उद्देश्य से लैंड पूलिंग नीति और आउस्टी (Oustee) नीति में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के तहत जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को अधिक आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट, स्टांप ड्यूटी में छूट तथा कई अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, संशोधित नीति के तहत लैंड पूलिंग योजना में आवासीय एवं व्यावसायिक दोनों श्रेणियां चुनने वाले जमीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज आवासीय प्लॉट पहले की तरह मिलेगा, जबकि व्यावसायिक प्लॉट का क्षेत्रफल 200 से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। यदि कोई जमीन मालिक केवल आवासीय श्रेणी का विकल्प चुनता है, तो अब उसे 1,630 वर्ग गज आवासीय प्लॉट प्रति एकड़ मिलेगा, जो पहले 1,600 वर्ग गज था। वहीं, केवल व्यावसायिक श्रेणी वाले प्रोजेक्ट्स में व्यावसायिक क्षेत्रफल 800 से बढ़ाकर 840 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। कैबिनेट ने आउस्टी नीति में भी संशोधन करते हुए अधिग्रहित भूमि के आधार पर प्लॉट का आकार तय किया है। इसके तहत एक एकड़ तक भूमि अधिग्रहित होने पर 200 वर्ग गज, एक से 2.5 एकड़ तक 300 वर्ग गज और 2.5 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहित होने पर 500 वर्ग गज का प्लॉट दिया जाएगा। सरकार ने छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था को भी मंजूरी दी है। साथ ही 'सुविधा प्रमाणपत्र' (फैसिलिटी सर्टिफिकेट) की वैधता दो वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष कर दी गई है। नई नीति के तहत विकसित प्लॉट लेने वाले मूल जमीन मालिकों को रजिस्ट्री या कन्वेयंस डीड के समय स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क से छूट मिलेगी। इसके अलावा, वे चाहें तो अधिग्रहित जमीन के कलेक्टर रेट के बराबर मूल्य तक पंजाब में कहीं भी भूमि खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में छूट का लाभ ले सकेंगे। कैबिनेट ने पात्र जमीन मालिकों को प्राथमिकता के आधार पर ट्यूबवेल कनेक्शन और प्रमुख स्थानों पर विकसित प्लॉट आवंटित करने का भी निर्णय लिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इन संशोधनों से पहले सरकार ने जमीन मालिकों और अन्य हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श किया था। उनके सुझावों और व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नीति में बदलाव किए गए हैं, ताकि किसानों और जमीन मालिकों को अधिक लाभ मिल सके।