एसआईए ने 737 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में किया पेश, हत्या को आतंकवादी साजिश का हिस्सा बताया
श्रीनगर (Narendra Singh Danu) : जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने 1990 में स्टाफ नर्स सरला भट के अपहरण, यातना और हत्या के मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। आरोपपत्र में प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपित बनाया गया है।
एसआईए के अनुसार, सरला भट का 18 अप्रैल 1990 को श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्कीम्स) से अपहरण किया गया था। आरोप है कि उन्हें बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं और बाद में श्रीनगर की उमर कॉलोनी में स्वचालित राइफल से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
एजेंसी ने बताया कि यह मामला 18 मार्च 2024 को एसआईए को सौंपा गया था। विस्तृत जांच के बाद तैयार आरोपपत्र में मौखिक, दस्तावेजी, फोरेंसिक, बैलिस्टिक, मेडिकल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है।
एसआईए का दावा है कि जांच में यह सामने आया कि सरला भट की हत्या कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि जेकेएलएफ की कथित साजिश के तहत अंजाम दिया गया आतंकवादी अपराध था।
चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा खुर्शीद अहमद चालकू, अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू के नाम शामिल हैं। इनमें अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी और गुलाम मोहम्मद टपलू की मृत्यु हो चुकी है, जबकि यासीन मलिक एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है।
एसआईए के अनुसार, मुख्य आरोपी खुर्शीद अहमद चालकू फरार है और उसके पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में होने की आशंका है। एजेंसी ने उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
एजेंसी का कहना है कि आतंकवाद के शुरुआती दौर में बने भय और आतंक के माहौल के कारण यह मामला दशकों तक लंबित रहा, क्योंकि गवाह सामने आने से डरते थे। अब उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।