एनसीपीआई में शामिल होने के बाद संसदीय क्षेत्र नहीं पहुंचीं सांसद, समर्थकों में असमंजस
कोलकाता/नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने के बाद सांसद जून मालिया के अपने संसदीय क्षेत्र मेदिनीपुर नहीं पहुंचने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके समर्थकों के बीच भी नई राजनीतिक स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।
जून मालिया के तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के फैसले के बाद कुछ समर्थक उनके साथ नए दल में जाने की बात कर रहे हैं, जबकि कई कार्यकर्ता फिलहाल किसी राजनीतिक गतिविधि से दूरी बनाए हुए हैं।
24 जून को जून मालिया के जन्मदिन के अवसर पर हर वर्ष मेदिनीपुर नगरपालिका की ओर से आयोजित किए जाने वाले रक्तदान शिविर भी इस बार नहीं लगाए गए। पिछले वर्षों में पूरे जून महीने के दौरान शहर के 25 वार्डों में 25 रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते थे।
मेदिनीपुर नगरपालिका के चेयरमैन सौमेन खान ने बताया कि इस बार विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और नई सरकार के गठन से जुड़ी व्यस्तताओं के कारण रक्तदान शिविर आयोजित नहीं हो सके। उन्होंने संकेत दिया कि जून मालिया महीने के अंत तक मेदिनीपुर आ सकती हैं।
इस बीच, जून मालिया के करीबी माने जाने वाले खड़गपुर की पूर्व विधायक प्रदीप सरकार भी तृणमूल कांग्रेस छोड़ चुकी हैं। वहीं छात्र और युवा नेताओं का कहना है कि वे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
पश्चिम मेदिनीपुर जिला तृणमूल कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष अजीत मैती ने कहा कि वह फिलहाल अस्वस्थ हैं और स्वस्थ होने के बाद ही इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देंगे।
उधर, खड़गपुर सदर के विधायक एवं राज्य मंत्री दिलीप घोष ने इस घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि "सब लोग भाग रहे हैं।"
वहीं, मेदिनीपुर जिला भाजपा के प्रवक्ता अरूप दास ने आरोप लगाया कि जून मालिया चुनाव परिणाम के बाद विरोध की आशंका के चलते मेदिनीपुर आने से बच रही हैं।