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New Delhi: कच्चातिवु द्वीप समझौते पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, बताया 'ऐतिहासिक भूल' - Uturn Time
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सुधांशु त्रिवेदी बोले- 1974 में राष्ट्रीय हितों से किया गया समझौता, तमिलनाडु के मछुआरे आज भी भुगत रहे हैं परिणाम
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तमिलनाडु से सटे पाक जलडमरूमध्य में स्थित कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका को सौंपने के 1974 के समझौते को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस निर्णय को कांग्रेस सरकार की विदेश नीति की "ऐतिहासिक भूल" और "शर्मनाक फैसला" करार दिया। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 26 जून 1974 का दिन कांग्रेस के "सरेंडर कैलेंडर" का एक काला अध्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया, जिसका खामियाजा आज भी तमिलनाडु के मछुआरों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कच्चातिवु द्वीप पर स्थित ईसाई समुदाय के पवित्र स्थल सेंट एंटनी श्राइन तक पहुंचने में भी भारतीय मछुआरों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, भारतीय ध्वज लगी नौकाओं को वहां जाने की अनुमति नहीं मिलती, जो कांग्रेस की विदेश नीति की विफलता का उदाहरण है। भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 1947 के विभाजन से लेकर 1948 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके), 1962 में अक्साई चिन और 1974 में कच्चातिवु द्वीप जैसे फैसले कांग्रेस की गलत नीतियों का परिणाम रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इन घटनाओं को याद रखना चाहिए। सुधांशु त्रिवेदी ने केरल की कांग्रेस नीत सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने कम अल्कोहल वाली शराब पर उत्पाद शुल्क 251 प्रतिशत से घटाकर 121 प्रतिशत कर दिया है, जिससे शराब पर कर में भारी कमी आई है। क्या है कच्चातिवु समझौता? कच्चातिवु द्वीप को लेकर भारत और श्रीलंका के बीच वर्ष 1974 में समुद्री सीमा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत पाक जलडमरूमध्य में स्थित लगभग 285 एकड़ का निर्जन कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका के अधिकार क्षेत्र में चला गया। यह मुद्दा लंबे समय से तमिलनाडु के मछुआरों और राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।