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Bikaner: बीकानेर यूनिवर्सिटी के NEFNS नियम के खिलाफ छात्र एकजुट, हजारों ईमेल भेजकर जताया आक्रोश - Uturn Time
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NEFNS नियम के खिलाफ डिजिटल आंदोलन, 1500 से अधिक छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को भेजे ईमेल
बीकानेर: बीकानेर विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में सेमेस्टर प्रणाली के अंतर्गत लागू किए गए NEFNS (Not Eligible For Next Semester) नियम को लेकर विद्यार्थियों में नाराज़गी लगातार बढ़ती जा रही है। विश्वविद्यालय के नए प्रावधान के अनुसार यदि किसी छात्र के प्रथम, तृतीय अथवा पंचम सेमेस्टर में किसी भी विषय में बैक (अनुत्तीर्ण) रहती है, तो उसे अगले सेमेस्टर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस नियम को लेकर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाई है। छात्रों का कहना है कि एक या दो विषयों में बैक आने पर पूरे वर्ष या सेमेस्टर को प्रभावित करना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय होगा। विद्यार्थियों की मांग है कि उन्हें अगले सेमेस्टर में अध्ययन जारी रखने की अनुमति दी जाए तथा सभी बकाया विषयों को छठे सेमेस्टर तक क्लियर करने का अवसर प्रदान किया जाए। इसी मुद्दे को लेकर छात्र हित में अर्जुन पंचारिया के निर्देशन में 1500 से अधिक विद्यार्थियों एवं साथियों द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन को सामूहिक ईमेल भेजकर अपनी मांगों से अवगत करवाने का प्रयास किया गया है। ईमेल के माध्यम से विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया है कि नियम पर पुनर्विचार करते हुए ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे छात्रों का शैक्षणिक वर्ष खराब न हो और उन्हें अपनी कमियों को सुधारने का उचित अवसर मिल सके। विद्यार्थियों का कहना है कि वर्तमान में उनका उद्देश्य पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात विश्वविद्यालय तक पहुंचाना है। हालांकि छात्रों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो यह मुद्दा आगे चलकर वृहद छात्र आंदोलन का रूप भी ले सकता है। फिलहाल विद्यार्थियों द्वारा प्रेमपूर्वक और संवैधानिक तरीके से अपनी मांग रखी गई है तथा अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं। छात्र समुदाय को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय उनकी समस्याओं को समझते हुए ऐसा निर्णय लेगा जो विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों और भविष्य दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो। छात्रों का मुख्य तर्क है कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को अवसर प्रदान करना होना चाहिए, न कि एक बैक के कारण उनके पूरे शैक्षणिक सत्र को प्रभावित करना। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है।