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चंडीगढ़ 18 Jan । चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा बारों को रात तीन बजे तक खुले रखने के प्रस्ताव को लेकर शहर में विरोध तेज़ होने लगा है। सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए प्रशासन को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि यह प्रस्ताव शहर की मूल पहचान, अनुशासित जीवनशैली और शांत वातावरण के खिलाफ है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ देश का पहला योजनाबद्ध शहर है, जिसकी पहचान सुव्यवस्थित बाजार, स्वच्छता, हरियाली और संतुलित दिनचर्या से रही है। उन्होंने कहा कि कुछ दशक पहले तक शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठान रात नौ बजे तक बंद हो जाते थे और यह परंपरा यहां के सामाजिक ढांचे का स्वाभाविक हिस्सा थी। संगठन ने प्रशासन को बताया कि सुबह के समय सुखना लेक सहित शहर के कई सार्वजनिक स्थलों पर लोग योग, वॉक, रनिंग और साइक्लिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। देर रात तक बारों के संचालन की अनुमति इस स्वस्थ जीवनशैली के बिल्कुल विपरीत है और इससे ‘सिटी ब्यूटीफुल’ की पहचान प्रभावित होगी। युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी संगठन ने गहरी चिंता जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि देर रात तक चलने वाली बार संस्कृति से युवाओं की नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इससे खेल, शिक्षा और उद्यमिता जैसी रचनात्मक गतिविधियों की जगह देर रात के मनोरंजन को बढ़ावा मिलेगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि चंडीगढ़ के अधिकांश स्थायी निवासी शोरगुल भरी नाइटलाइफ संस्कृति के समर्थक नहीं हैं। शहर की छवि एक सुरक्षित, शांत और परिवार-उन्मुख शहर के रूप में रही है, जिसे इस प्रस्ताव से नुकसान पहुंच सकता है। महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी संगठन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। देर रात ड्यूटी के बाद सुरक्षित घर वापसी, अपराध की आशंका और कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था न होने पर चिंता व्यक्त की गई है। संगठन ने कहा कि नाइटलाइफ विस्तार से पहले कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। एसोसिएशन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह फैसला वास्तव में शहर के दीर्घकालिक हित में है या केवल राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। संगठन के अनुसार, अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लिए शहर की संस्कृति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक हित से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा यातायात, शोर-प्रदूषण और सार्वजनिक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर किसी ठोस अध्ययन या स्पष्ट कार्ययोजना के अभाव पर भी आपत्ति जताई गई है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि सभी पहलुओं पर गंभीर मंथन किए बिना बारों को रात तीन बजे तक खोलने का निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।