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श्री नरेंद्र भामरा (कन्वीनर) के नेतृत्व में व्यापार एवं उद्योग संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने, जिसमें श्री जतिंदर मित्तल (चेयरमैन, यूसीपीएमए), श्री राजिंदर नारंग (मुख्य सलाहकार, यूसीपीएमए), सरदार हरसिमरजीत सिंह लक्की (प्रधान, यूसीपीएमए), सरदार गुरमीत सिंह कुलार (प्रधान, फिको), श्री हनी सेठी (महासचिव, सीआईसीयू), श्री पंकज शर्मा (प्रधान, एआईटीयू), सरदार सतनाम सिंह मक्कड़ (प्रधान, डीआईडब्ल्यूए), श्री राजीव जैन (महासचिव) एवं श्री सुरेश राणा (चेयरमैन, प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन), श्री अनिल सचदेवा, श्री टी.आर. मिश्रा सहित शहर के अन्य सम्मानित उद्योगपति शामिल थे, ने श्रीमती रीना गुप्ता, चेयरपर्सन, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) से मुलाकात की तथा उद्योगों को पीपीसीबी से संबंधित आ रही समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने निम्नलिखित मांगों सहित एक लिखित ज्ञापन सौंपा: 1. उद्योगों ने पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुपालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 2. पुरानी लघु, मध्यम एवं बड़े उद्योगों की वर्गीकरण प्रणाली में संशोधन कर नवीनतम एमएसएमई वर्गीकरण को लागू करने की मांग की। 3. सहमति शुल्क (Consent Fee) की गणना केवल अवमूल्यित (Depreciated) उत्पादक प्लांट एवं मशीनरी के आधार पर करने तथा फर्नीचर, वाहन, कार्यालय उपकरण एवं अन्य गैर-उत्पादक परिसंपत्तियों को बाहर रखने की मांग की। 4. मनमाने ढंग से जारी किए जा रहे कारण बताओ नोटिसों पर चिंता व्यक्त करते हुए किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पूर्व पर्याप्त अवसर देने की मांग की। 5. बिजली कनेक्शन बहाल करने हेतु लगाए जा रहे पर्यावरणीय मुआवजे (Environmental Compensation), जो प्रायः ₹1 लाख से शुरू होता है, का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। 6. दंडात्मक प्रवर्तन के स्थान पर अनुपालन-आधारित नियामक व्यवस्था लागू करने की मांग की। 7. प्रदूषण संबंधी उल्लंघनों के लिए बिजली कनेक्शन काटने एवं उद्योगों को बंद करने की सिफारिशों का विरोध किया। 8. बिजली विच्छेदन संबंधी प्रावधानों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि ऐसे कदम अत्यधिक, अनुचित एवं उद्योगों के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण हैं। 9. सुझाव दिया कि यदि उल्लंघन किसी विशेष प्रक्रिया या क्षेत्र तक सीमित हो तो केवल उसी हिस्से को सील किया जाए तथा शेष फैक्ट्री संचालन जारी रहने दिया जाए। 10. उद्योग जगत का विश्वास बहाल करने हेतु आवश्यकतानुसार प्रशासनिक पुनर्गठन एवं अधिकारियों के तबादलों की मांग की। 11. क्षेत्रीय अधिकारियों एवं एक्सईएन स्तर के अधिकारियों के लिए वार्षिक स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की। 12. पूरे पंजाब में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की मांग की ताकि विभिन्न अधिकारियों द्वारा अलग-अलग व्याख्याओं को समाप्त किया जा सके। 13. सैंपलिंग एवं निरीक्षण प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु GPS-टैग्ड सैंपलिंग, QR-कोडेड सैंपल बोतलें, निरीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग, 24 घंटे के भीतर निरीक्षण रिपोर्ट अपलोड करने तथा ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल की व्यवस्था की मांग की। 14. पीपीसीबी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों एवं उद्योग प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए संयुक्त विवाद समाधान समिति के गठन का प्रस्ताव रखा। 15. क्षेत्रीय कार्यालय-I एवं क्षेत्रीय कार्यालय-II, लुधियाना का स्वतंत्र ऑडिट करवाने की मांग की, जिसमें जारी नोटिस, बंदी आदेश, विलंब, शिकायतें एवं सहमति प्रक्रिया की समयसीमा शामिल हो। 16. समयबद्ध सेवा वितरण प्रणाली लागू करने की मांग की: Consent to Establish – 30 दिन Consent Renewal – 15 दिन Inspection Report Upload – 24 घंटे Representations का निपटारा – 15 दिन Appeals का निपटारा – 30 दिन 17. पीपीसीबी एवं औद्योगिक संगठनों के बीच चेयरपर्सन के नेतृत्व में त्रैमासिक बैठकों को संस्थागत रूप देने की मांग की। यह ज्ञापन लुधियाना की 16 प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से समर्थित है, जो हजारों औद्योगिक इकाइयों का प्रतिनिधित्व करती हैं।