Buy High Quality BacklinksNettoyage professionnel en SavoieInstant URL Indexingcasino link building servicesbuy cheap backlinkWebshellfast google indexingBuy hidden backlinksPremium Backlinks for SEObuy backlinkshacklink satin alBuy Hidden Backlinkchambery porn
पंजाब भर में मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ बनी जीवनरेखा - Uturn Time
Uturn Time
Breaking
Ludhiana: नगर निगम कर्मचारियों का पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन Amritsar: अमृतसर में रेलवे ट्रैक के पास फिर मिला संदिग्ध कैमरा, सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप Jalandhar: PM मोदी के स्वागत की तैयारी तेज, केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने लिया इंतजामों का जायजा Amritsar: बब्बर खालसा इंटरनेशनल नेटवर्क पर शिकंजा,हथियारों और विस्फोटकों की खेप बरामद, सीआई ने तीन तस्करों को दबोचा New Delhi: भारत ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का किया सफल परीक्षण, 60 किमी दूर लक्ष्य पर साधा सटीक निशाना Dehradun: उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य, 98.7% साक्षरता दर का बनाया रिकॉर्ड Jalandhar: PM मोदी के कार्यक्रम से पहले जालंधर कैंट स्टेशन की तैयारियों का निरीक्षण, रवनीत बिट्टू ने परखी व्यवस्थाएं रेलवे क्वार्टर से मिली टेक्नीशियन की लाश, बदबू आने पर पता चला इनीशिएटर्स ऑफ चेंज के नेतृत्व में सतलुज फिल्म की बहाली को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन सेंसेक्स 1,677 अंक गिरा, गिरावट के तीन मुख्य कारण निकलकर आए सामने जगतार सिंह को मिला प्रमोशन, जॉइंट सीपी ने इंस्पेक्टर पद पर किया पदोन्नत लुधियाना में राजस्व पटवार यूनियन की बैठक, जालंधर में प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान
Logo
Uturn Time
पंजाब में बदलते तापमान और उमस भरी गर्मी के आगमन के साथ एक बार फिर मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया है। रोजमर्रा की बीमारियों से राहत दिलाने के लिए पहले से ही मरीजों की भारी भीड़ झेल रहे सरकारी अस्पतालों में अब बुखार संबंधी बीमारियों, सांस से जुड़ी संक्रमणों और पेट संबंधी समस्याओं के मामलों में नया इज़ाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार यह मौसमी लहर हर वर्ष चिंताजनक रूप से वापस लौटती है। एक्यूट फेब्राइल इलनेस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि अचानक तेज बुखार के साथ उत्पन्न होने वाली ऐसी स्थिति है, जिसमें कई प्रकार की बीमारियां शामिल हो सकती हैं। यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, ऐसी स्थितियां वायरल, बैक्टीरियल या परजीवी संक्रमणों के कारण हो सकती हैं। कई बार मरीज बुखार को मुख्य लक्षण मानकर अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि संक्रमण का वास्तविक कारण शुरुआती चरण में स्पष्ट नहीं हो पाता। पंजाब की ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार महीनों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस कैशलेस इलाज के दावों की सबसे बड़ी श्रेणियों में शामिल रही। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, एक्यूट फेब्राइल इलनेस के 5,840 मामले दर्ज किए गए, जिन पर 1.31 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया। इसके अलावा, पानी से फैलने वाली और सांस संबंधी बीमारियों के मामले भी सामने आए। एंटेरिक फीवर के 1,396 मामले दर्ज हुए, जिन पर 30.47 लाख रुपये के दावे किए गए। निमोनिया के 377 मामलों पर 11.06 लाख रुपये, जबकि एक्यूट ब्रोंकाइटिस के 326 मामलों पर 9.24 लाख रुपये खर्च हुए। वहीं मानसून के दौरान अक्सर चर्चा में रहने वाली बीमारियों के मामले तुलनात्मक रूप से कम रहे। डेंगू के केवल 12 मामले दर्ज हुए, जिन पर 40,880 रुपये का दावा हुआ। मलेरिया के सिर्फ 3 मामले, चिकनगुनिया के 6 मामले और हीट स्ट्रोक के 4 मामले सामने आए, जो यह दर्शाता है कि इस अवधि के दौरान अत्यधिक गर्मी से संबंधित अस्पताल में भर्ती होने के मामले तुलनात्मक रूप से कम हैं। हालांकि, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने की सलाह दे रहे हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक अध्ययन के अनुसार बारिश, मच्छरों की बढ़ती संख्या और स्थानीय स्वच्छता की स्थितियों के अनुसार मौसमी प्रकोप तेजी से बदल सकते हैं। सिविल अस्पताल, पटियाला के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विकास गोयल ने बताया कि यह स्थिति हर वर्ष ओपीडी में देखे जाने वाले सामान्य मौसमी दबाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर आसानी से संभाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण एक्यूट फेब्राइल इलनेस, उल्टियां, दस्त, सिरदर्द, सांस से जुड़ी संक्रमणों तथा त्वचा और आंखों से संबंधित एलर्जी के मामले बढ़ जाते हैं। गर्म मौसम के कारण लोग अक्सर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉ. विकास गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, क्योंकि इसके तहत उन्हें बिना आर्थिक बोझ के अस्पताल में भर्ती होकर कैशलेस इलाज मिल रहा है। उन्होंने कहा, “यह योजना सुनिश्चित करती है कि मरीज अग्रिम भुगतान की चिंता किए बिना समय पर इलाज प्राप्त कर सकें।” डॉ. विकास गोयल ने बताया, “इस योजना के तहत बीमारी का तुरंत पता लगाना और इलाज कई लोगों की जान बचाने में मदद कर सकता है, क्योंकि अब मरीजों को खर्च की चिंता के कारण चिकित्सा सहायता लेने में देरी होने की संभावना कम हो गई है।” बच्चे अत्यधिक गर्मी और उमस वाले मौसम में सबसे अधिक संवेदनशील रहते हैं। गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. शशि कांत धीर ने चेतावनी दी कि नवजात और छोटे बच्चे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि ठीक से भोजन न करना, बार-बार उल्टियां होना, तेज सांस चलना, डिहाइड्रेशन, दौरे पड़ना और लगातार बुखार जैसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को किसी भी प्रकार का बुखार होने की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय देखभाल देना आवश्यक है। डॉ. शशि कांत धीर ने यह भी कहा कि जागरूकता अभियान, स्वच्छता शिक्षा, टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण उपायों के माध्यम से संक्रमण के फैलाव को रोकने में अभिभावकों, आशा वर्करों, आंगनवाड़ी कर्मचारियों और स्कूलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। फिलहाल, जैसे-जैसे पंजाब एक और लंबी गर्मी के लिए तैयारी कर रहा है, अस्पतालों के भीड़भाड़ वाले गलियारे यह याद दिला रहे हैं कि मौसमी बीमारियां आज भी परिवारों और जन स्वास्थ्य प्रणाली दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।