मोहाली/यूटर्न/19 मई। करीब 15 साल पुराने आबकारी एवं कराधान अधिकारी (ETO) रणजीत सिंह आत्महत्या मामले में आज 19 मई को मोहाली की जिला अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में पंजाब पुलिस की पूर्व विजिलेंस एसपी अमनदीप कौर और व्यवसायी राजिंदर सिंह गोपी को दोषी करार देते हुए 3-3 साल के कठोर कारावास (बामशक्कत कैद) की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 120-बी (अपराधिक साजिश) के तहत दोषी पाया। अदालत ने माना कि इन दोनों ने मिलकर ईटीओ रणजीत सिंह को रिश्वत के झूठे मामले में फंसाया था, जिसके कारण वे गहरे मानसिक तनाव में चले गए और अंततः उन्होंने आत्महत्या कर ली। जबकि मामले के सह-आरोपी परमजीत सिंह को अदालत ने बरी कर दिया है, दो अन्य आरोपियों की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है। पीड़ित रनजीत सिंह की पत्नी मनजीत कौर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजविंदर सिंह बैंस और अधिवक्ता गुरमीत सिंह अदालत में पेश हुए। यह घटना अप्रैल 2011 की है, जब मोहाली के फेज-2 स्थित अपने आवास पर ईटीओ रणजीत सिंह ने जहरीली गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली थी। इससे ठीक कुछ दिन पहले, 29 मार्च 2011 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मोहाली के बस्सी सिनेमा के पास एक कथित जाल (ट्रैप) बिछाकर उन्हें गिरफ्तार किया था।
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