रविवार को भी छटपटाते रहे अधिकारी:अरुण गिल
जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : पंजाब भर में सफाई सेवकों और नगर पालिका कर्मचारियों के चल रहे तीखे आंदोलन से घबराई पंजाब सरकार अब पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रही है। इस प्रदर्शन को कुचलने और कमजोर करने के लिए रविवार की छुट्टी के दिन भी प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस प्रशासन एड़ी-चोटी का जोर लगाते रहे (छटपटाते रहे), लेकिन सफाई कर्मचारियों ने सरकार के झूठे आश्वासनों और भारी दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया। यह तीखा दावा सफाई सेवक यूनियन के जिला अध्यक्ष अरुण गिल ने नगर परिषद जगरांव में चल रहे धरने के दौरान किया।
रात से लेकर सुबह तक प्रशासन ने डाला डेरा यूनियन अध्यक्ष अरुण गिल ने बताया कि बीते शनिवार की रात से ही सरकार अपने अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को आगे कर आंदोलन को खत्म कराने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है। देर रात तक पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकों का दौर चलता रहा, जबकि रविवार सुबह से ही तहसीलदार रेशम सिंह और सिटी थाना प्रभारी परमिंदर सिंह नगर परिषद जगराओं के दफ्तर में डटे रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बार-बार प्रदर्शनकारियों को सरकार द्वारा "जल्द समाधान" का दिलासा देकर धरना समाप्त करने का आग्रह किया। हालांकि, संघर्ष कर रहे सफाई कर्मचारियों ने एक सुर में साफ कर दिया कि:
"जब तक पंजाब स्तरीय केंद्रीय बॉडी की तरफ से कोई लिखित नोटिफिकेशन या स्पष्ट आदेश नहीं आता, तब तक यह धरना किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं किया जाएगा।"
चुनाव आचार संहिता का बहाना बना रही सरकार: अध्यक्ष गिल ने कहा कि यह स्थिति सिर्फ जगरांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पंजाब में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश भड़का हुआ है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अब 'चुनाव आचार संहिता' का बहाना बनाकर नोटिफिकेशन जारी करने से भाग रही है, जबकि यह आंदोलन 6 मई से लगातार चल रहा है और चुनावों की घोषणा इसके कई दिनों बाद हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने वादों से मुकर रही है, लेकिन अब सफाई कर्मचारी किसी भी तरह के झूठे झांसे में आने वाले नहीं हैं।
मांगें पूरी न होने पर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
उन्होंने सरकार को दोटूक चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक लिखित रूप में मांगें मानकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता, तब तक पंजाब के सभी सफाई सेवक और म्यूनिसिपल कर्मचारी इस संघर्ष को और अधिक धार देंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में पैदा हो रहे मौजूदा हालातों के लिए सफाई कर्मचारी नहीं, बल्कि पंजाब सरकार खुद जिम्मेदार है। अगर समय रहते जायज मांगें मान ली जातीं, तो आज टकराव की यह नौबत ही न आती।
विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन:
इस दौरान धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आज के इस प्रदर्शन में सफाई कर्मचारियों को समर्थन देने के लिए 'ग्रामीण मजदूर यूनियन' के अध्यक्ष अवतार सिंह तारी और 'कीर्ति किसान यूनियन' के सुखदेव सिंह मानूके विशेष रूप से शामिल हुए।