कैश और महंगे फोन बरामद, तीन आरोपी गिरफ्तार
मोहाली (अजीत झा): पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े कथित रिश्वत कांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। मामला एक स्टेट टैक्स ऑफिसर से विजिलेंस जांच बंद करवाने के बदले रिश्वत मांगने से जुड़ा है। जांच के दायरे में विजिलेंस विभाग के कुछ अधिकारी भी आ गए हैं, जबकि डीजीपी विजिलेंस के रीडर ओपी राणा फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता अधिकारी ने आरोप लगाया था कि विकास उर्फ विक्की गोयल और उसका बेटा राघव गोयल उसके खिलाफ लंबित विजिलेंस शिकायत को खत्म करवाने के बदले 20 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। दोनों खुद को विजिलेंस के वरिष्ठ अधिकारियों का करीबी बताते थे और दावा कर रहे थे कि पैसे देकर मामला बंद करवाया जा सकता है।
जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि डीजीपी विजिलेंस के रीडर ओपी राणा ने शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया था कि रिश्वत मिलने के बाद कार्रवाई रोक दी जाएगी। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया गया।
सूत्रों के मुताबिक बाद में रिश्वत की रकम 20 लाख से घटाकर 13 लाख रुपये कर दी गई थी। इसके साथ एक महंगा सैमसंग गैलेक्सी जेड फोल्ड-7 मोबाइल फोन भी मांगा गया था, जिसे कथित तौर पर ओपी राणा के लिए बताया गया।
सीबीआई ने 11 मई को चंडीगढ़ में ट्रैप लगाकर कार्रवाई की। इस दौरान अंकित वाधवा नामक आरोपी को शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपये नकद और मोबाइल फोन लेते हुए गिरफ्तार किया गया। एजेंसी ने मौके से नकदी और फोन बरामद कर लिया।
कार्रवाई के दौरान राघव गोयल, विकास गोयल और ओपी राणा मौके से फरार हो गए। सीबीआई का दावा है कि वहां मौजूद कुछ गनमैनों ने आरोपियों को पहले ही सतर्क कर दिया था। इसके बाद एजेंसी ने पीछा कर पंजाब-हरियाणा सीमा के पास अंबाला क्षेत्र से राघव गोयल, विकास गोयल और दो गनमैनों को पकड़ लिया। हालांकि ओपी राणा अब भी फरार हैं।
सीबीआई ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी भी की। मलोट स्थित विकास और राघव गोयल के घरों तथा चंडीगढ़ में ओपी राणा के ठिकाने से करीब 9 लाख रुपये नकद और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि विजिलेंस मामलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी निजी लोगों के साथ साझा की जा रही थी। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन अधिकारियों या बिचौलियों की भूमिका रही।
मामले में एक और बड़ा खुलासा यह हुआ है कि निजी आरोपियों को पंजाब पुलिस के गनमैन उपलब्ध कराए गए थे। ये गनमैन एके-47 राइफलों से लैस बताए जा रहे हैं। सीबीआई अब यह भी जांच कर रही है कि निजी व्यक्तियों को सरकारी सुरक्षा किस आधार पर दी गई थी और क्या इन गनमैनों की भूमिका आरोपियों को बचाने में रही।
सीबीआई ने गिरफ्तार आरोपियों को चंडीगढ़ की विशेष अदालत में पेश किया है। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।