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"700 करोड़ बैंक घोटाले में नया मोड़: CBI जांच के बाद भी खातों को ‘अनफ्रीज’ कराने की कोशिश पर हाईकोर्ट सख्त"
चंडीगढ़ (अजीत झा.): आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा से जुड़े करीब 700 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग घोटाले की जांच को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस और यूटी प्रशासन की भूमिका पर गंभीर नाराजगी जताई और पूछा कि जब मामला पहले ही सीबीआई को सौंपा जा चुका था, तब स्थानीय स्तर पर खातों से फ्रीज हटाने संबंधी पत्र क्यों जारी किए गए। कोर्ट में बैंक की ओर से बताया गया कि 27 अप्रैल को गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद मामले से जुड़ी एफआईआर और जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई थी। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने नियमित केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। बावजूद इसके, 2 मई और 8 मई को चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा कुछ बैंकों को ऐसे पत्र भेजे गए, जिनमें खातों पर लगे लियन और फ्रीज हटाने की बात कही गई। बैंक ने अदालत को बताया कि जिन खातों को राहत देने की कोशिश हुई, वे कथित तौर पर उसी नेटवर्क से जुड़े थे जिनके माध्यम से करोड़ों रुपये के लेनदेन हुए। बैंक के अनुसार, जांच के दौरान ऐसे खातों से प्रतिबंध हटना वित्तीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता था और इससे रकम निकाले जाने की आशंका बढ़ जाती। सुनवाई में यह भी सामने आया कि मामले में करीब 50 से 70 बैंक खाते जांच के घेरे में हैं और कुल रकम लगभग 700 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब जांच एजेंसी बदल चुकी है और सीबीआई जांच संभाल रही है, तब स्थानीय पुलिस की भूमिका सीमित हो जाती है। अदालत ने यूटी प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा कि जांच ट्रांसफर होने के बाद ऐसे पत्र जारी करने का कानूनी आधार क्या था। कोर्ट ने प्रशासन के वकील को निर्देश दिए कि अगली सुनवाई में 2 मई और 8 मई को जारी पत्रों को लेकर विस्तृत जवाब पेश किया जाए। बैंक की ओर से सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला भी दिया गया। दलील दी गई कि साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में संदिग्ध रकम को बिना एफआईआर के भी फ्रीज किया जा सकता है और ऐसी रकम की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मानी गई है। अब अगली सुनवाई में हाईकोर्ट यह तय करेगा कि सीबीआई जांच शुरू होने के बाद चंडीगढ़ पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर थी या नहीं।