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"गोशालाओं पर खर्च के बावजूद समस्या बरकरार, लोगों ने उठाई ठोस समाधान की मांग"
जीरकपुर: शहर में आवारा पशुओं का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि आए दिन लोग इनकी चपेट में आकर घायल हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है। ढकोली, बलटाना, पीरमुछल्ला, पटियाला रोड, बिशनपुरा, वीआईपी रोड और अंबाला रोड सहित शहर के अधिकांश इलाकों में आवारा पशुओं के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। कई स्थानों पर ये पशु सड़क के बीचों-बीच बैठ जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वाहन चालक इन पशुओं को बचाने के प्रयास में हादसे का शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद नगर परिषद की ओर से कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा रही। लोगों का आरोप है कि पशुओं को पकड़ने की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है। गौ सेवा सैस के बावजूद नहीं हुआ समाधान: पंजाब में करीब 10 वर्ष पहले अकाली-भाजपा सरकार द्वारा गौ सेवा सैस के नाम पर स्टांप ड्यूटी, बिजली, शराब और पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाया गया था। इस सैस से आज भी सरकार करोड़ों रुपये की वसूली कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। गायों के संरक्षण के नाम पर वर्षों से सैस वसूला जा रहा है, इसके बावजूद जीरकपुर समेत पूरे प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या गंभीर बनी हुई है। गोशालाओं को सरकारी सहायता मिलने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई संचालक आज भी जनसहयोग से व्यवस्थाएं चला रहे हैं। कागजों में गौशाला, सड़कों पर गायें: नगर परिषद के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में केवल 149 गायों को पकड़ा गया, जिनमें से 127 को स्थानीय गौशाला और 22 को लालडू स्थित मगरा गौशाला भेजा गया। पिछले कुछ वर्षों में कुल 656 गायों को ही पकड़ा जा सका है। वहीं नगर परिषद हर महीने 50-60 गाय पकड़ने का दावा करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर में आज भी हजारों की संख्या में आवारा गौवंश सड़कों पर घूम रहा है। ऐसे में इतने सीमित प्रयासों से समस्या के समाधान पर सवाल उठना लाजिमी है। काऊ सैस: करोड़ों की वसूली, नतीजा शून्य 2021-22 : 91.06 लाख रुपये 2022-23 : 76.74 लाख रुपये 2024-25 : 57.49 लाख रुपये गोशालाओं पर खर्च, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था: नगर परिषद द्वारा लालडू स्थित मगरा गौशाला और तहसील रोड की गोपाल गौशाला को हर महीने चारे और देखभाल के लिए लाखों रुपये दिए जाते हैं। इसके बावजूद न तो गोशालाओं की क्षमता बढ़ाई गई और न ही पशुओं को पकड़ने की गति में कोई खास सुधार हुआ है। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की है।