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"कोठे अठ चक में सियासी उलटफेर, AAP छोड़ अकाली दल में हुए शामिल"
​जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न): हल्का जगरांव के गांव कोठे अठ चक में आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के संस्थापक सदस्य और पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष जगरूप सिंह की अगुवाई में बड़ी संख्या में परिवारों ने 'झाड़ू' का साथ छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया। पूर्व विधायक एस.आर. क्लेर और वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह ने इन सभी कार्यकर्ताओं का पार्टी में स्वागत किया। ​विवाद की जड़: गांव का नाम बदलने की साजिश: ​पार्टी छोड़ने का मुख्य कारण गांव के नाम को लेकर उपजा विवाद रहा। पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष जगरूप सिंह ने सत्ताधारी पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि: ​"विधायिका सर्वजीत कौर माणुंके ने एक खास परिवार को राजनीतिक लाभ पहुँचाने के लिए गांव का ऐतिहासिक नाम 'कोठे अठ चक' बदलकर 'कोठे अठ चक बलदेव सिंह वाला' करने की साजिश रची थी। उन्होंने हमें धोखे में रखा, जिससे गांव वासियों की भावनाओं को भारी ठेस पहुँची है।" ​एस.आर. क्लेर के नेतृत्व में मिली जीत का असर: ​ग्रामीणों ने बताया कि गांव के वजूद और इतिहास को बचाने के लिए एस.आर. क्लेर ने जिस तरह से सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक लड़ाई लड़ी, उसने लोगों का दिल जीत लिया। इसी संघर्ष की जीत के बाद आज पूरा गांव 'अकाली रंगों' में रंगा नजर आया। ​ ​एस.आर. क्लेर (पूर्व विधायक): "किसी भी गांव का नाम सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उसकी विरासत और संस्कृति होती है। मुझे खुशी है कि हम लोकतंत्र के दायरे में रहकर इस धक्केशाही के खिलाफ लड़े और जीत हासिल की। आज शामिल हुए सभी साथियों को पार्टी में पूरा मान-सम्मान मिलेगा।" ​शिवराज सिंह: "इस घटना ने साबित कर दिया है कि आम आदमी पार्टी के नेता अपने निजी स्वार्थों के लिए अपने ही वर्करों की भावनाओं की कद्र नहीं करते।" ​समारोह की मुख्य बातें: ​गांव के बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं ने बड़ी संख्या में शिरकत की। ​एस.आर. क्लेर को सिरोपा और सम्मान चिह्न देकर सम्मानित किया गया। ​नए शामिल हुए सदस्यों ने कहा कि वे वर्तमान सरकार की जनविरोधी नीतियों से दुखी होकर विकास और हक की आवाज बुलंद करने के लिए अकाली दल के साथ जुड़े हैं। ​निष्कर्ष: चुनावों से पहले जगरूप सिंह जैसे पुराने और सक्रिय नेता का पार्टी छोड़ना विधायिका माणुंके और 'आप' के लिए इस क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है।