Uturn Time
Breaking
Chandigarh: 9 मई को धुरी में शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन, रोष मार्च का ऐलान Panipat: फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता, डॉ. दहिया का किसानों को संदेश अगर किसी को गाली देनी हो या ब्लैक मेलर कहना हो , तो उसे पत्रकार कह दो ! Kurukshetra: ‘सुलतान-उल-कौम’ जस्सा सिंह अहलूवालिया को जयंती पर किया गया नमन Kurukshetra: मुख्यमंत्री सैनी के नेतृत्व में प्रदेश में विकास का दौर जारी: सुमन सैनी Kurukshetra: पक्षियों की प्यास बुझाने को अनोखी पहल, राहगीरों को बांटे जाएंगे कसोरे Zirakpur: अलग-अलग स्थानों से दो लड़कियां गायब, पुलिस तलाश में जुटी Zirakpur: विवादित जमीन पर फर्जीवाड़ा, जांच में सामने आए बड़े खुलासे Derabassi: करोड़ों की ठगी से हड़कंप, इको ग्रींस-2 में दुकानदार संकट में Zirakpur: वीआईपी रोड से लापता नाबालिग, परिजनों में मचा हड़कंप बेअदबी कानून को अकाल तख्त ने किया नामंजूर, जत्थेदार गड़गज बोले-पंथ की इजाजत के बिना कैसे बना कानून Derabassi: रंगे हाथ पकड़े गए चोर, पोल्ट्री फार्म में बड़ी वारदात टली
Logo
Uturn Time
"पटवारी पर गंभीर आरोप, फर्जी दस्तावेज से जमीन रजिस्ट्री की कोशिश"
जीरकपुर: गाजीपुर क्षेत्र की स्टेटस-क्वो के तहत आने वाली विवादित जमीन के साथ कथित छेड़छाड़ कर फर्जी फर्द के आधार पर रजिस्ट्री कराने के मामले में जीरकपुर पुलिस ने पटवारी जगदीश शर्मा और मधु सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है। सरकारी रिकार्ड में हेराफेरी के गंभीर आरोपों के चलते मामला सुर्खियों में है। शिकायतकर्ता जसविंदर कौर पत्नी कृपाल सिंह निवासी देसू माजरा ने आरोप लगाया कि पारिवारिक बंटवारे के बाद उसके हिस्से आई करीब 9 कनाल 9 मरले जमीन पर 17 सितंबर 2010 को डेराबस्सी अदालत द्वारा स्टेटस-क्वो के आदेश जारी किए गए थे। इसके बावजूद आरोपियों ने कथित तौर पर 15 कनाल 9 मरले की फर्जी फर्द तैयार कर ली। आरोप है कि इस फर्द के आधार पर 2 जनवरी 2012 को पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई और बाद में करीब 6 कनाल जमीन की रजिस्ट्री पटवारी की माता के नाम करवा दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार न तो उसकी सहमति ली गई और न ही कोई भुगतान किया गया। जांच के दौरान पूर्व पटवारी जसपाल सिंह के बयान भी सामने आए हैं, जिन्होंने रजिस्ट्री के साथ लगी फर्द पर दर्ज हस्ताक्षरों को अपना मानने से इनकार किया। उनका कहना है कि हस्ताक्षर स्कैन कर अन्य दस्तावेजों से इस्तेमाल किए गए हैं। इससे मामले में फर्जीवाड़े के आरोप और गहरे हो गए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि उक्त रजिस्ट्री के आधार पर इंतकाल दर्ज कराने की कोशिश की गई थी, जिसे तहसीलदार ने जांच के बाद नामंजूर कर दिया। दूसरी ओर, आरोपियों ने लगाए गए आरोपों को नकारते हुए पुराने समझौतों का हवाला दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।