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आप से भाजपा में दलबदल के बाद प्रदूषण की पुरानी शिकायतें फिर सामने आईं चंडीगढ़/यूटर्न/30 अप्रैल। एक नाटकीय घटनाक्रम में, पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) की टीमों ने गुरुवार को बरनाला में ट्राइडेंट ग्रुप की यूनिट पर एक बड़ा छापा मारा। इस कार्रवाई ने एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, क्योंकि यह कार्रवाई ट्राइडेंट के मालिक राजेंद्र गुप्ता के आम आदमी पार्टी (आप) से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद हुई है। अधिकारियों के अनुसार, दोपहर के समय पीपीसीबी के लगभग नौ वाहन बरनाला के धौला गांव में स्थित ट्राइडेंट फैक्ट्री परिसर में दाखिल हुए। जांच टीमें चार घंटे से अधिक समय तक अंदर रहीं और उन्होंने अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों, उत्सर्जन नियंत्रणों और नियमों के पालन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। बताया जा रहा है कि प्रयोगशाला में विश्लेषण के लिए नमूने एकत्र किए गए हैं, हालांकि जांच के नतीजों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस कार्रवाई को अलग अलग तरीके से देख रहे लोग इस कार्रवाई के समय ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। जहां अधिकारी इसे पर्यावरणीय चिंताओं पर आधारित एक नियामक कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में हाल के घटनाक्रमों के चश्मे से देख रहे हैं। राजेंद्र गुप्ता जो पहले आप से राज्यसभा सांसद थे, कुछ ही दिन पहले बीजेपी में शामिल हुए थे और इस संदर्भ में इस छापे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक बदलाव और इस कार्रवाई के बीच कोई औपचारिक संबंध अभी तक स्थापित नहीं हुआ है। शिकायतें और अतीत में कथित निष्क्रियता सालों से, बरनाला और उसके आसपास रहने वाले लोग ट्राइडेंट ग्रुप की इस यूनिट से होने वाले कथित वायु और जल प्रदूषण को लेकर चिंता जताते रहे हैं। भूजल के दूषित होने से लेकर औद्योगिक उत्सर्जन तक की शिकायतें कई बार अधिकारियों को सौंपी गई हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद, ठोस कार्रवाई बहुत कम हुई है। रसूख के कारण पहले नहीं हो रहा था एक्शन कई निवासी इस कथित देरी का कारण कंपनी के नेतृत्व के औद्योगिक और राजनीतिक रसूख को मानते हैं। ट्राइडेंट ग्रुप, जो इस क्षेत्र में रोजगार देने वाली एक बड़ी कंपनी है, अपने आर्थिक योगदान के कारण स्थानीय स्तर पर काफी समर्थन हासिल करता रहा है। चर्चा है कि इस आर्थिक योगदान के कारण ही प्रशासन द्वारा इस ग्रुप पर एक्शन नहीं लिया जाता था। जबकि सरकार का रवैया भी ढ़ीला रहा। हालांकि लोग समय समय पर इस ग्रुप द्वारा प्रदूषण फैलाने को लेकर मामला उठाते रहे हैं। अब आगे क्या होगा फिलहाल, पीपीसीबी के अधिकारियों ने जांच के विस्तृत नतीजे साझा नहीं किए हैं और मीडिया के सवालों का भी कोई जवाब नहीं दिया गया है। प्रयोगशाला की रिपोर्टों और नियमों के पालन की जांच के नतीजों से ही आगे की कार्रवाई तय होगी। इस कार्रवाई में जुर्माना लगाना, सुधारात्मक उपायों के निर्देश देना, या आगे की कानूनी कार्यवाही करना शामिल हो सकता है। इस घटना ने न केवल पंजाब में औद्योगिक प्रदूषण की जाँच-पड़ताल को तेज़ कर दिया है, बल्कि यह भी उजागर किया है कि नियामक कार्रवाई किस तरह राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ सकती है। फिलहाल, सभी की नज़रें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस हाई-प्रोफाइल जाँच से सामने आ रहे तथ्यों को स्पष्ट करेगी। ---