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फोर्टिस अस्पताल मोहाली के डॉक्टरों ने दो गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का सफलतापूर्वक इलाज किया। इन दोनों नवजात शिशुओं को दुर्लभ और जानलेवा जन्मजात बीमारियां थीं, जिनके तुरंत इलाज की जरूरत थी। ये मामला समय पर बीमारी का पता लगाने और नवजात शिशुओं की विशेष सर्जिकल देखभाल के महत्व को दिखाता है। ये जटिल सर्जरी डॉक्टरों की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने की, जिसका कुशल नेतृत्व डॉ. संदीप कुमार जगलान, कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक सर्जरी, फोर्टिस अस्पताल मोहाली ने किया। यह टीम उच्च जोखिम वाले नवजात मामलों को संभालने में अपनी एडवांस्ड पीडियाट्रिक सर्जिकल विशेषज्ञता को दर्शाती है। पहले मामले में, अस्पताल की पीडियाट्रिक सर्जरी टीम ने एक दिन के प्री-टर्म (समय से पहले जन्मे) बच्चे को नई ज़िंदगी दी। इस बच्चे को 'इसोफेजियल एट्रेसिया विद डिस्टल ट्रेकियोइसोफेजियल फिस्टुला' नामक एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी थी। इस बीमारी में भोजन की नली (फूड पाइप) पूरी तरह से विकसित नहीं होती और पेट से अलग रहती है, जबकि सांस की नली (विंडपाइप) के साथ एक असामान्य जुड़ाव बना लेती है। यह बीमारी लगभग हर 3,000 से 4,000 जीवित जन्मों में से किसी एक में पाई जाती है। यह मामला विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था क्योंकि बच्चे का वज़न सिर्फ़ 1.9 किलोग्राम था और वह 'टेट्रालॉजी ऑफ़ फैलोट' से भी पीड़ित था - यह दिल का एक दुर्लभ जन्मजात दोष है जो लगभग हर 10,000 जन्मों में से 5 में होता है और इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी वाला खून दौड़ता है। जन्म के तुरंत बाद ही नवजात को सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगी। काफी डिटेल में की गई क्लिनिकल जांच के बाद, मेडिकल टीम ने तीन घंटे की एक जटिल सर्जरी की। सर्जरी के दौरान, डॉक्टरों ने पाया कि भोजन की नली का ऊपरी हिस्सा बंद था, जबकि निचला हिस्सा सांस की नली से असामान्य रूप से जुड़ा हुआ था, और दोनों सिरों के बीच 3.5 सेंटीमीटर का अंतर था। सर्जिकल टीम ने सांस की नली और भोजन की नली के बीच के असामान्य जुड़ाव को बंद करके और भोजन की नली के सिरों को सावधानीपूर्वक फिर से जोड़कर इस दिक्कत को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया। सर्जरी की जटिलता के बावजूद, खून का नुकसान बहुत कम हुआ और बच्चा 15 दिनों के भीतर पूरी तरह से ठीक हो गया। एक अन्य गंभीर मामले में, डॉक्टरों की टीम ने 35 दिन के एक शिशु का इलाज किया, जिसे 'एक्स्ट्राहेपेटिक बिलियरी एट्रेसिया' नामक बीमारी थी। यह नवजात शिशुओं में लिवर से जुड़ी एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है, जो उन पित्त नलिकाओं (बाइल डक्ट्स) में रुकावट के कारण होती है जो लिवर से पित्त को आंत तक ले जाती हैं। यह स्थिति लगभग हर 10,000 से 15,000 जीवित जन्मों में से एक को प्रभावित करती है। जन्म के बाद से ही शिशु को लगातार पीलिया था, साथ ही उसका मल पीला और पेशाब गहरा रंग का था - जो इस बीमारी के मुख्य चेतावनी संकेत हैं। सर्जिकल टीम ने 'कसाई पोर्टोएंटेरोस्टॉमी' (Kasai Portoenterostomy) की, जो पित्त को सीधे आंत में निकालने के लिए एक नया रास्ता बनाने की एक विशेष प्रक्रिया है। सर्जरी के बाद, शिशु का मल सामान्य रंग का आने लगा और उसके पीलिया में भी काफी सुधार देखने को मिला। शिशु की नाज़ुक हालत के कारण यह प्रोसीजर तकनीकी रूप से काफी कठिन थी। इन मामलों के बारे में विस्तार से बताते हुए, डॉ. संदीप कुमार जगलान, कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक सर्जरी, फोर्टिस अस्पताल मोहाली ने कहा कि "नवजात सर्जरी में शुरुआती निदान और समय पर इलाज बहुत ज़रूरी है, खासकर उन जटिल जन्मजात डिसऑर्डर्स ( विकृतियों) में जहां हर एक घंटा नतीजों में बड़ा फ़र्क ला सकता है। ये मामले बच्चों की नाज़ुक हालत, कम वज़न और उनसे जुड़ी अन्य जटिलताओं के कारण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण थे। ऐसी स्थितियों को संभालने के लिए न केवल सर्जिकल सटीकता की ज़रूरत होती है, बल्कि एक अत्यधिक कोऑर्डिनेटेड मल्टी-डिस्प्लनरी दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होती है, जिसमें नियोनेटोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, इंटेंसिविस्ट और विशेष एनआईसीयू सहायता शामिल हो। पीडियाट्रिक सर्जरी और नवजात देखभाल में हुई प्रगति के साथ, अब कई जानलेवा जन्मजात स्थितियों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है, जिससे इन बच्चों के जीवित रहने की संभावना और उनके जीवन की लॉन्गटर्म क्वालिटी में काफी सुधार हुआ है।