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चंडीगढ़/यूटर्न/25 अप्रैल। राघव चड्ढा ने आप छोड़कर बीजेपी में शामिल होकर राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में जो हलचल मचाई थी, उसके एक दिन बाद ही उनकी लोकप्रियता को झटका लगता दिख रहा है। चड्ढा अपने साथ आप के छह राज्यसभा सांसदों को भी बीजेपी में ले गए, जिससे अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी को अपने सांसदों को एकजुट रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। चड्ढा का बीजेपी में जाना कोई हैरानी की बात नहीं थी, क्योंकि कुछ हफ़्ते पहले ही उन्हें आप के राज्यसभा उप-नेता पद से हटा दिया गया था; लेकिन ऐसा लगता है कि उनके इस कदम से आज की युवा पीढ़ी प्रभावित नहीं हुई है। आज के डिजिटल ज़माने में, सोशल मीडिया फॉलोअर्स को अक्सर किसी की लोकप्रियता मापने का पैमाना माना जाता है। आंकड़ों से पता चलता है कि बीजेपी में शामिल होने के 24 घंटे से भी कम समय में चड्ढा के Instagram पर लगभग 10 लाख फॉलोअर्स कम हो गए। शुक्रवार को, 37 वर्षीय राज्यसभा सांसद के 1.46 करोड़ (14.6 मिलियन) फॉलोअर्स थे। शनिवार दोपहर 1 बजे तक, उनके फॉलोअर्स की संख्या घटकर 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) रह गई। युवा पीढ़ी ने चलाया अभियान राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा, खासकर 'जेन जैड', चड्ढा के खिलाफ इस विरोध की अगुवाई कर रहे हैं। क्या आंकड़ों पर चलने वाले यह राजनेता इन आंकड़ों को स्वीकार करके अपनी स्थिति में सुधार ला पाएंगे? एनसीपी एसपी के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने ट्वीट किया, इंस्टाग्राम पर जेन जैड द्वारा चलाए गए एक वायरल 'अनफॉलो' अभियान के कारण राघव चड्ढा के फॉलोअर्स 24 घंटे में ही 10 लाख कम हो गए। उन्होंने आगे कहा, "इंटरनेट आपको रातों-रात हीरो बना सकता है, और इंटरनेट ही आपको रातों-रात ज़ीरो पर भी ला सकता है। राघव चड्ढा की लोकप्रियता को झटका लगा दरअसल, चड्ढा ने युवाओं के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने लगातार ऐसे मुद्दे उठाए जो सीधे तौर पर लोगों के रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करते थे और इनमें से ज़्यादातर मुद्दे अक्सर राजनीतिक चर्चाओं में नज़रअंदाज़ कर दिए जाते हैं। इन मुद्दों में पितृत्व अवकाश, ट्रैफिक की समस्या, टेलीकॉम कंपनियों द्वारा तय की गई दैनिक डेटा सीमा, और यहाँ तक कि हवाई अड्डों पर महंगे समोसे तथा '10-मिनट डिलीवरी मॉडल' के ज़रिए 'गिग वर्कर्स' (अस्थायी कर्मचारियों) के शोषण जैसे "छोटे-मोटे मुद्दे" भी शामिल थे। उन्होंने 'गिग वर्कर्स' की चुनौतियों को खुद अनुभव करने के लिए एक दिन Blinkit के डिलीवरी पार्टनर के तौर पर भी काम किया था। मेहनत लाई रंग उनकी यह मेहनत तब रंग लाई, जब केंद्र सरकार ने डिलीवरी कंपनियों के लिए '10-मिनट में डिलीवरी' की अनिवार्य समय-सीमा को खत्म करने का आदेश जारी किया। इन सभी चीज़ों ने चड्ढा की छवि एक ऐसे राजनेता के तौर पर बनाई, जिससे लोग आसानी से जुड़ सकते थे। राज्यसभा में जेन जैड से जुड़े मुद्दों पर उनके खास ध्यान ने पारंपरिक राजनीति और युवाओं की उम्मीदों के बीच की खाई को पाटने में मदद की। चड्ढा को एक अलग तरह के नेता के तौर पर देखा जाता था। पहले भी मिला समर्थन यहां तक कि जब चड्ढा को राज्यसभा में आप के उप-नेता पद से हटाया गया, तब भी उन्हें लोगों का ज़बरदस्त समर्थन मिला। आप सांसद, जिनकी शादी बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से हुई है, ने एक Instagram Reel भी शेयर की, जिसमें एक यूज़र ने सुझाव दिया था कि चड्ढा को अपनी खुद की एक "जेन जैड पार्टी" बनानी चाहिए। हालांकि, आखिर में चड्ढा ने बीजेपी को चुना। इसके साथ ही, ऐसा लगता है कि उनका समर्थक वर्ग भी अब दूसरी तरफ़ जा रहा है। जिन लोगों ने उन्हें Unfollow किया, उनमें पर्वतारोही रोहताश खिलेरी भी शामिल थे। रोहताश हाल ही में दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति बने, जिन्होंने यूरोप के माउंट एल्ब्रस पर बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के 24 घंटे बिताए। युवा कह रहे अनफॉलो करें राजनीतिक विश्लेषक दीक्षा कांडपाल ने ट्वीट किया, "राघव चड्ढा की Instagram पर पहली पोस्ट पर जाइए और देखिए कि वहां कितने 'Unfollow' वाले कमेंट्स हैं। मुझे बहुत सारे युवा ऐसे दिख रहे हैं, जो उन्हें Unfollow करने की बात कह रहे हैं।" दरअसल, "#unfollowRaghavChadha" हैशटैग के साथ एक ट्रेंड पहले से ही ज़ोर पकड़ रहा है। कई यूज़र्स ने यह भी बताया कि चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से वे पुरानी पोस्ट्स डिलीट कर दी हैं, जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की आलोचना की थी।