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महाराणा प्रताप भवन, लालड़ू में सोमवार को पनेशिया बायोटेक कंपनी से निकाले गए कर्मचारियों की एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल-कम-लेबर कोर्ट, मोहाली द्वारा सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले की प्रति कर्मचारियों के साथ साझा की गई। माननीय न्यायाधीश श्रीमती कमल वरिंदर द्वारा सुनाया गया यह फैसला कर्मचारियों के लंबे संघर्ष और एटक (AITUC) की कानूनी लड़ाई की बड़ी जीत माना जा रहा है। बैठक को संबोधित करते हुए पंजाब एटक के उपाध्यक्ष Vinod Chugh ने बताया कि वर्ष 2013 में कर्मचारियों ने एकजुट होकर यूनियन का गठन किया था और अपनी मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद प्रबंधन ने कथित तौर पर प्रतिशोध की भावना से 11 यूनियन नेताओं और 12 सक्रिय सदस्यों को नौकरी से निकाल दिया तथा उनका तबादला गुड़गांव कर दिया। उन्होंने बताया कि 27 मार्च 2014 को कंपनी ने सैकड़ों कर्मचारियों को भी अवैध रूप से बर्खास्त कर दिया था, जिसके खिलाफ कर्मचारियों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। विनोद चुघ के अनुसार अदालत ने कंपनी प्रबंधन की कार्रवाई को ‘अनफेयर लेबर प्रैक्टिस’ मानते हुए श्रम आयुक्त, पंजाब को निर्देश दिए हैं कि प्रबंधन के खिलाफ इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट, 1947 की धारा 25T और 25U के तहत कार्रवाई की जाए। अदालत ने तबादला किए गए 23 कर्मचारियों को 100 प्रतिशत बकाया वेतन सहित तथा अन्य सैकड़ों कर्मचारियों को 50 प्रतिशत बकाया वेतन और सभी पूर्व लाभों के साथ तत्काल नौकरी पर बहाल करने के आदेश दिए हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2013 से लंबित वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता और जनवरी से मार्च 2014 तक का बकाया वेतन भी देने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस अवसर पर यूनियन अध्यक्ष जसमेर सिंह राणा, पवन कुमार शर्मा और रमन कुमार ने कहा कि यह जीत लंबे संघर्ष और नेतृत्व की दृढ़ता का परिणाम है। कर्मचारियों ने विनोद चुघ को फूलमालाएं पहनाकर सम्मानित किया और संघर्ष में सहयोग देने वाले क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।