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एचआईवी के साथ हेपेटाइटिस सी से भी हो रहे हैं पीड़ित
अशोक सहगल लुधियाना यूटर्न 17 अप्रैल : जिले में 50% अधिक एचआईवी पॉजिटिव लोग ड्रग्स लेते हैं इसके अलावा वह हेपेटाइटिस सी से भी पीड़ित हो रहे हैं विशेषज्ञों के अनुसारक् 2019 से अब तक ज़िले में रिपोर्ट किए गए लगभग 4 000 हेपेटाइटिस C मामलों में से 2550 के करीब IDUs हैं और रिपोर्ट किए गए 300 से अधिक हेपेटाइटिस B मामलों में से लगभग 200 IDUs यानी इंजेक्टबल ड्रग्स यूजर हैं। डॉक्टर कर्टनेस एक्यूपंक्चर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ इंद्रजीत सिंह ने बताया कि "बिना स्टेरिलाइज़ की हुई सुई शेयर करने से HIV होने की संख्या में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। पहले लोगों को वायरस होने का सबसे बड़ा कारण बिना प्रोटेक्शन के सेक्सुअल एक्टिविटीज़ में शामिल होना था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल करना सबसे बड़ा कारण बन गया है।" डॉ इंद्रजीत सिंह ने आंकड़ों को खंगालते हुए बताया कि लुधियाना में ज़्यादातर HIV मरीज़ इंट्रावीनस ड्रग यूज़र्स (IDUs) के हो गए हैं। HIV मरीज़ों में IDUs का परसेंटेज 2010 में कुल मरीज़ों के सिर्फ़ 12.8% से बढ़कर 2024 में रिपोर्ट किए गए मरीज़ों का 59.16% हो गया है। 2024 में, ज़िले में 1658 केस आए और इनमें से 981 IDUs थे। 2010 में, ज़िले में 794 HIV केस आए और इनमें से सिर्फ़ 1,012 IDUs थे। पिछले वर्षों का ब्योरा इस प्रकार है वर्ष कुल मामले ड्रग यूज़र मौतें 2024 ----- 1658----- 981 -- ------24 2023-------2020------1477---------22 2022-------1929 ------1295--------29 2021-------1,195---------711---------10 2020--------995-------523-----------9 2019--------1357-------640----------2 2018---------970-------265-----------2 2017---------802--------107-----------8 2016---------697---------91------------0 2015---------789---------68------------2 2014---------825---------55------------0 2013---------759---------36-------------2 2012---------808---------95------------ 5 2011----------795---------67-------------5 2010---------794--------102-------------2 पिछले दो वर्षों में स्थिति और भी खराब बताई जाती है परंतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा जानबूझकर उसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया जा रहा HIV मरीज़ों में IDU की संख्या बढ़ने के साथ, मौतों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है। 2011 में उस हफ़्ते रिपोर्ट किए गए कुल मरीज़ों में से सिर्फ़ 5 की मौत हुई थी, 2024 में यह संख्या बढ़कर 24 हो गई। IDU और मौतों की संख्या में यह बढ़ोतरी ड्रग यूज़र्स में एंटी रेट्रो वायरल (ART) सिस्टम का सख्ती से पालन न करने की वजह से हुई। फिर एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद मरीज अपना रोग प्रकट नहीं करना चाहता फल स्वरुप एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी नहीं लेते और रोग बिगड़कर एड्स हो जाता है सरकार HIV एड्स की रोकथाम के लिए एक प्रोग्राम टारगेट इंटरवेंशन प्रोजेक्ट चलाती है, जिसमें गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को सुइयां देना शामिल है। ये संगठन शेयर की गई सुइयों के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। डॉ. कोटनिस एक्यूपंक्चर हॉस्पिटल और एजुकेशन सेंटर चलाने वाले डॉ. इंद्रजीत ढींगरा ने कहा, "2008 में सरकार ने घोषणा की थी कि अगर हम ड्रग्स के खतरे को कंट्रोल नहीं कर सकते, तो हम यह पक्का कर सकते हैं कि उन्हें HIV एड्स, HVC, HCB जैसी इंफेक्शन वाली बीमारियां न हों। इसलिए, इस प्रोग्राम के तहत हमें ये सुइयां यूज़र्स को बांटने के लिए दी जाती हैं। ड्रग यूज़र्स हमें रजिस्टर करते हैं, और हम उन्हें सुइयां देते हैं।" डॉ. ढींगरा के अनुसार, यह समस्या नए नशेड़ियों में प्रोग्राम के बारे में जागरूकता की कमी के कारण थी, "नए नशेड़ियों को पता नहीं होता कि उन्हें ये हो सकती हैं। उन्होंने कहा, "वे हमसे सुई लेते हैं। इसलिए, वे सुई शेयर करते रहते हैं क्योंकि इन सुइयों को पाने का कोई और तरीका नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "जब भी कोई नशेड़ी प्रोग्राम के लिए रजिस्टर करने के लिए NGO के पास आता है, तो हम उनका HIV टेस्ट करवाते हैं जिससे ऐसे कई मरीज सामने आए जिन्हें एचआईवी पॉजिटिव आया उन्होंने कहा कि इस मामले में व्यापक प्रोग्राम चलाने की जरूरत है