गुस्ताख़ी माफ़
लड़ते-लड़ते थक गये, रुको ज़रा-सा यार।
आओ दोनों बैठकर, थोड़ा दम लें मार।
थोड़ा दम लें मार, ख़त्म ना होंगे टंटे।
कर लें युद्ध विराम, चलो हम 'बत्ती घंटे'।
कह साहिल कविराय, आ गये गिरते-पड़ते।
रूस और यूक्रेन, थक गये लड़ते-लड़ते।
प्रस्तुति -- डॉ. राजेन्द्र साहिल