Uturn Time
Breaking
Ludhiana: नगर निगम कर्मचारियों का पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन Amritsar: अमृतसर में रेलवे ट्रैक के पास फिर मिला संदिग्ध कैमरा, सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप Jalandhar: PM मोदी के स्वागत की तैयारी तेज, केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने लिया इंतजामों का जायजा Amritsar: बब्बर खालसा इंटरनेशनल नेटवर्क पर शिकंजा,हथियारों और विस्फोटकों की खेप बरामद, सीआई ने तीन तस्करों को दबोचा New Delhi: भारत ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का किया सफल परीक्षण, 60 किमी दूर लक्ष्य पर साधा सटीक निशाना Dehradun: उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य, 98.7% साक्षरता दर का बनाया रिकॉर्ड Jalandhar: PM मोदी के कार्यक्रम से पहले जालंधर कैंट स्टेशन की तैयारियों का निरीक्षण, रवनीत बिट्टू ने परखी व्यवस्थाएं रेलवे क्वार्टर से मिली टेक्नीशियन की लाश, बदबू आने पर पता चला इनीशिएटर्स ऑफ चेंज के नेतृत्व में सतलुज फिल्म की बहाली को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन सेंसेक्स 1,677 अंक गिरा, गिरावट के तीन मुख्य कारण निकलकर आए सामने जगतार सिंह को मिला प्रमोशन, जॉइंट सीपी ने इंस्पेक्टर पद पर किया पदोन्नत लुधियाना में राजस्व पटवार यूनियन की बैठक, जालंधर में प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान
Logo
Uturn Time
लुधियाना/यूटर्न/31 मार्च अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण LPG गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो रही है, लेकिन लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री ने इसका प्रभावी समाधान खोज लिया है। यहां के उद्योगपति अब LPG के बजाय एग्रो वेस्ट फ्यूल जैसे पराली और राइस हस्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। खास बात यह है कि कुछ साल पहले प्रदूषण के चलते उद्योगों पर LPG अपनाने का दबाव था, लेकिन स्थानीय उद्यमियों ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में एग्रो वेस्ट को चुन लिया। लुधियाना में 400 से अधिक डाइंग यूनिट्स हैं, जिनमें से करीब 100 यूनिट्स एग्रो वेस्ट फ्यूल का उपयोग कर रही हैं। इससे गैस की कमी के बावजूद उत्पादन पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। साथ ही, खेतों में पराली जलाने की समस्या को भी काफी हद तक कम करने में मदद मिली है।पंजाब डाइंग एसोसिएशन के सदस्य विशाल जैन के अनुसार, समय रहते ईंधन का विकल्प अपनाना उद्योग के लिए फायदेमंद साबित हुआ। कारोबारी कमल चौहान ने इसे पर्यावरण और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी बताया। वहीं सुभाष सैनी का मानना है कि यह मॉडल लंबे समय के लिए टिकाऊ समाधान है। यह पहल न सिर्फ उद्योग को मजबूती दे रही है, बल्कि किसानों के लिए भी पराली का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर रही है, जिससे प्रदूषण कम हो रहा है।