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चंडीगढ़/यूटर्न/27 मार्च।इमिग्रेशन फ्रॉड और चेक बाउंस से जुड़े बहुचर्चित मामले में जिला अदालत ने आरोपी दविंदर सिंह गिल को दो साल की सजा सुनाई है। यह मामला चंडीगढ़ पुलिस की वांटेड और 50 हजार की इनामी क्रिस्पी खेहरा से भी जुड़ा हुआ है, जिसका नाम पूरे घटनाक्रम में सामने आया है, हालांकि उसे अभी सजा नहीं हुई है। करीब साढ़े छह साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोषी को 25 लाख रुपये शिकायतकर्ता को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। यदि मुआवजा नहीं दिया गया, तो उसे छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कनाडा भेजने के नाम पर 30 लाख की ठगी मामले के अनुसार, सेक्टर-46 निवासी मेडिकल स्टोर संचालक नरेश भाटिया से आरोपियों ने उनके बेटे को कनाडा भेजने का झांसा देकर 30 लाख रुपये लिए थे। पैसे लेने के बाद न तो युवक को विदेश भेजा गया और न ही रकम लौटाई गई। पत्नी के नाम पर बनाया भरोसा जांच और कोर्ट रिकॉर्ड में सामने आया कि दविंदर गिल ने शिकायतकर्ता को विश्वास दिलाया था कि उसकी पत्नी क्रिस्पी खेहरा इमिग्रेशन का काम संभालती है और वही पूरी प्रक्रिया पूरी करवाएगी। इसी भरोसे में आकर पीड़ित ने बड़ी रकम दे दी। बैंक ट्रांजैक्शन से खुली भूमिका सुनवाई के दौरान यह भी साबित हुआ कि कुल 30 लाख में से 14 लाख रुपये सीधे क्रिस्पी खेहरा के बैंक खाते में आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर किए गए थे। इससे उसके लेन-देन में शामिल होने की पुष्टि हुई। चेक बाउंस से केस मजबूत कोर्ट ने पाया कि आरोपियों ने कुल 30 लाख रुपये के पांच पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे, जिनमें से दो चेक क्रिस्पी खेहरा के नाम पर थे। हालांकि यह मामला विशेष रूप से 25 लाख रुपये के उस चेक से संबंधित था, जो दविंदर गिल के खाते से जारी हुआ और बाउंस हो गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसी चेक बाउंस के आधार पर दविंदर गिल को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है, जबकि क्रिस्पी खेहरा की भूमिका अलग से जांच और कार्रवाई के दायरे में बनी हुई है।