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चंडीगढ़/ यूटर्न/20 मार्च।चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मोहाली स्थित Ivy Hospital और उसके तीन डॉक्टरों को 19 वर्षीय छात्रा गुरप्रीत कौर की मौत के मामले में गंभीर मेडिकल लापरवाही का दोषी ठहराया है। आयोग ने अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों पर कुल 45 लाख रुपये का मुआवजा लगाया, जबकि सेक्टर-16 स्थित सरकारी अस्पताल को इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई। यह मामला चंडीगढ़ निवासी कविता की बेटी गुरप्रीत कौर से जुड़ा है, जो बीकॉम की छात्रा थी और आईएएस बनने का सपना देखती थी। 19 दिसंबर 2021 को उसे दस्त और अन्य लक्षणों के चलते सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर 20 दिसंबर को Ivy Hospital, मोहाली में शिफ्ट किया गया। 22 दिसंबर 2021 को उसकी मौत हो गई। आयोग ने पाया कि अस्पताल में सेंट्रल वेनस कैथेटर गलत जगह लगाया गया, जो करीब 32 घंटे तक पता नहीं चल पाया। ICU प्रोटोकॉल के तहत इसकी तुरंत जांच जरूरी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिसे आयोग ने गंभीर लापरवाही माना। इसके अलावा डेंगू टेस्ट में भी करीब 5 घंटे की देरी हुई और रिपोर्ट समय पर नहीं आई, जिससे इलाज प्रभावित हुआ। मामले में डॉ. गुरप्रीत सिंह बबरा, डॉ. चेतन गोयल और डॉ. राजीव धुनना पर भी जुर्माना लगाया गया है। आयोग ने अस्पताल को 10 लाख और तीनों डॉक्टरों को कुल 35 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, साथ ही 40 हजार रुपये मुकदमे की लागत भी निर्धारित की।