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220 केवी हाईटेंशन लाइन को लेकर किसानों का विरोध, मुआवजे पर विवाद बरकरार – बिना सहमति खेतों में काम शुरू करने का आरोप – खड़ी फसल को नुकसान, किसान न्याय की मांग पर अड़े डेराबस्सी 29 Dec : हैबतपुर क्षेत्र में 220 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन बिछाने को लेकर किसानों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि पावरकॉम विभाग की लापरवाही के चलते उनकी जमीन और फसलों को नुकसान पहुंचा है, जबकि अब तक न तो उनकी सहमति ली गई और न ही किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, विभाग द्वारा पहले दो बिजली खंभों की नींव डाली गई थी, जो बाद में गलत साबित हुई। शिकायत के बाद विभाग ने रातों-रात एक खंभा उखाड़ लिया। आरोप है कि अपनी गलती छिपाने के लिए विभाग ने पहले से प्रस्तावित छह तारों वाली लाइन को 12 तारों में तब्दील कर उसी रूट से नई लाइन डालने का काम शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि भारी मशीनरी खेतों में चलाने से उनकी खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसके बावजूद विभाग ने न तो किसानों से पूर्व अनुमति ली और न ही किसी तरह का मुआवजा तय किया गया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इसी रूट में मुस्लिम वक्फ बोर्ड की जमीन भी आती है, जिसके लिए वक्फ बोर्ड और प्रशासन के बीच करीब 53 लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बन चुकी है। किसानों का सवाल है कि जब सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थाओं की जमीन के लिए आसानी से मुआवजा तय किया जा सकता है, तो निजी जमीन के मालिक किसानों को उनके अधिकार से क्यों वंचित किया जा रहा है। मामले को लेकर विभाग द्वारा कुछ जिम्मेदार किसानों के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाए जाने से रोष और बढ़ गया। इसके विरोध में सोमवार को हैबतपुर गांव के निवासी मुबारकपुर चौकी पर एकत्र हुए और शांतिपूर्ण लेकिन मजबूती से प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग की। इस संबंध में जब पावरकॉम डेराबस्सी के एसडीओ अमृतपाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर डीसी मोहाली के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को जो भी मुआवजा दिया जाएगा, वह विभाग की ओर से ही दिया जाएगा और इस विषय पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल किसानों और प्रशासन के बीच कलेक्टर रेट को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। वहीं, हैबतपुर गांव के निवासियों और ग्राम पंचायत ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए इसका न्यायसंगत समाधान निकाला जाए। किसानों को उनकी जमीन और फसलों के नुकसान का मुआवजा बाजार दर के अनुसार, उनकी सहमति से और कार्य शुरू होने से पहले दिया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया कानूनी और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके।