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विप्र समाज की छवि धूमिल करने का आरोप, एडीसी को सौंपा ज्ञापन
चंडीगढ़ 09 Feb : नव निर्मित फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर चंडीगढ़ में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। देवार्चन परिषद (पंजीकृत), चंडीगढ़ ने फिल्म को विप्र समाज के सम्मान के खिलाफ बताते हुए इसके प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इसी सिलसिले में परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर अमनदीप सिंह भट्टी से मुलाकात कर औपचारिक ज्ञापन सौंपा। ‘सुनियोजित तरीके से समाज को बदनाम किया जा रहा’ परिषद के अध्यक्ष पं. रामगोपाल के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह फिल्म एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर उसकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की फिल्मों के जरिए सनातन परंपरा और विप्र समाज को गलत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। प्रशासन से सख्त कदम उठाने की अपील पं. रामगोपाल ने कहा कि देवार्चन परिषद किसी भी ऐसी रचना का विरोध करेगी, जो किसी समाज को अपमानित करती हो। उन्होंने प्रशासन से न केवल फिल्म पर रोक लगाने, बल्कि इसके निर्माताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। आंदोलन की चेतावनी परिषद ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस मांग पर निर्णय नहीं लिया, तो संगठन को आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कई पदाधिकारी रहे मौजूद इस दौरान देवार्चन परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से पं. लाखीराम, पं. दिनेश, पं. चंद्र भूषण, पं. गुरु प्रसाद, पं. राजेंद्र, पं. संजय, पं. शिव कुमार, पं. रोशन, पं. प्रकाश, पं. सुरेश, पं. मनोज, पं. कमलनयन और पं. अमरदेव शामिल रहे। परिषद का कहना है कि समाज की गरिमा और सांस्कृतिक मूल्यों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।