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परिजनों का आरोप—गंदे पानी से बिगड़ी हालत, नगर निगम पर उठे गंभीर सवाल
अजीत झा. चंडीगढ़ 09 Feb : पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मौलीजागरां इलाके में दूषित पानी पीने से आठ वर्षीय बच्ची की मौत के बाद अब एक और बच्चा गंभीर हालत में पीजीआई के आईसीयू में भर्ती है और कोमा में बताया जा रहा है। इन घटनाओं ने नगर निगम की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोल दी है। पेट दर्द से शुरू हुई तबीयत, फिर बिगड़ती चली गई बीमार बच्ची के पिता अमर भारती ने बताया कि उनकी बेटी ने पहले पेट दर्द की शिकायत की थी। धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और उसे पीजीआई रेफर करना पड़ा, जहां वह अब आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। परिजनों का सीधा आरोप है कि घर में आ रहे गंदे पानी की वजह से ही बच्ची की तबीयत खराब हुई। पहले श्रेया, अब दूसरा मामला इससे पहले दो दिन पूर्व मौलीजागरां में ही आठ साल की श्रेया की मौत हो चुकी है। उसके पिता सूरज का कहना है कि उनकी बेटी की मौत पीलिया से हुई, जो दूषित पानी के कारण फैला। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद भी नगर निगम की टीम उनसे यह लिखवाने पहुंची कि उनके घर में साफ पानी आ रहा है, जो बेहद आपत्तिजनक है। फॉर्म भरवाकर हकीकत दबाने का आरोप स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से यह लिखवा रहे हैं कि उन्हें स्वच्छ पानी मिल रहा है और सिर्फ एक दिन का सैंपल लेकर व्यवस्था को सही साबित करने की कोशिश की जा रही है। लोगों का कहना है कि रोज़ाना आ रही गंदगी को एक दिन के सैंपल से नहीं नापा जा सकता। सीवर और पानी की लाइनें मिल रही हैं? स्थानीय निवासी विजय यादव ने बताया कि मौलीजागरां में सीवरेज लाइनें अक्सर चोक रहती हैं। कई बार सीवर और पेयजल की पाइपलाइनें आपस में मिल जाती हैं, जिससे पानी दूषित हो जाता है। इसके बावजूद इस गंभीर तकनीकी खामी को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। मेयर के निर्देश, फिर भी हालात जस के तस श्रेया की मौत के बाद मेयर सौरभ जोशी ने जल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि सेक्टर-49 और धनास जैसे अन्य इलाकों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे साफ है कि यह समस्या सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। निष्पक्ष जांच की मांग स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि दूषित पानी की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए | जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो और जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक सुरक्षित वैकल्पिक जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए