एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के बोर्ड से अपने उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आग्रह किया है। वर्ष 2017 में चेयरमैन बने चंद्रशेखरन ने कहा कि उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा और वह इसके बाद पुनर्नियुक्ति नहीं चाहते। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने एयर इंडिया अधिग्रहण, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक विस्तार जैसे क्षेत्रों में बड़े कदम उठाए।
नई दिल्ली (Naren Danu) : देश के प्रमुख उद्योग समूह टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होने के संकेत मिल गए हैं। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को घोषणा की कि उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने के बाद वह पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे। उन्होंने बोर्ड से अपने उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है।
40 साल के सफर के बाद लिया फैसला
63 वर्षीय चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि टाटा समूह में उनके पेशेवर जीवन के करीब 40 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देना उनके लिए बेहद संतोषजनक अनुभव रहा है और पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी रहा।
उन्होंने बोर्ड से अपील की कि फरवरी 2027 के बाद समूह का नेतृत्व कौन करेगा, इस पर समय रहते स्पष्टता सुनिश्चित की जाए, ताकि नेतृत्व परिवर्तन सुचारु रूप से हो सके।
पांच साल के कार्यकाल की सिफारिश, लेकिन फैसला अटका
चंद्रशेखरन के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके अगले पांच वर्षीय कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी। इस प्रस्ताव को टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति और बोर्ड के स्तर पर भी दर्ज किया गया था।
हालांकि, 24 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल सका। इसके बाद चंद्रशेखरन ने निर्णय को कुछ समय के लिए स्थगित करने का विकल्प चुना।
उन्होंने कहा कि इसके बाद करीब छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। इसी बीच टाटा संस कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं के कार्यान्वयन के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भविष्य के नेतृत्व को लेकर समय रहते स्पष्टता जरूरी है।
बोर्ड से जल्द उत्तराधिकारी चुनने की अपील
चंद्रशेखरन ने टाटा संस के बोर्ड से अनुरोध किया है कि वह जल्द से जल्द उत्तराधिकार को लेकर निर्णय करे, ताकि उनके मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने से पहले नेतृत्व परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सके।
उन्होंने अपने बयान के अंत में टाटा समूह के सभी हितधारकों के समर्थन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
2017 में संभाली थी टाटा संस की कमान
एन. चंद्रशेखरन ने वर्ष 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और एमडी रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में टीसीएस ने वैश्विक आईटी सेवा बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत की।
चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा समूह ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, वैश्विक विस्तार, तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बड़े रणनीतिक कदम उठाए।
Air India अधिग्रहण से EV तक, बड़े फैसलों के लिए याद किया जाएगा कार्यकाल
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने एयर इंडिया का अधिग्रहण किया और विमानन क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को बड़े स्तर पर बढ़ाया। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश बढ़ाने के साथ समूह की कंपनियों को नई तकनीकी दिशा देने पर भी जोर रहा।
अब चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी का चयन टाटा संस के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला होगा। 20 फरवरी 2027 की समयसीमा को देखते हुए बोर्ड के सामने न केवल नया चेयरमैन चुनने की चुनौती है, बल्कि नेतृत्व के इस बदलाव को टाटा समूह की मौजूदा रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ सहज रूप से जोड़ने की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।