बालाघाट के प्रभावित गांवों में बीमारी फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शिविर और अस्थायी अस्पताल शुरू किए हैं। 47 बच्चे फिलहाल अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, जबकि स्वस्थ हुए 51 बच्चों को छुट्टी दी जा चुकी है। बीमारी की वास्तविक वजह जानने के लिए सैंपल पुणे की लैब भेजे गए हैं। विशेषज्ञ पोषण, पानी और संक्रमण से जुड़े संभावित कारणों की जांच कर रहे हैं।
बालाघाट (Naren Danu) : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल गांवों में फैली बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। अडोरी, कुंडेकसा, बोंदारी और कोरका गांवों में अब तक 1 से 13 वर्ष की उम्र के छह बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हैं। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य व्यवस्था को अलर्ट कर दिया है और भोपाल तक मामले की निगरानी शुरू हो गई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को जबलपुर मेडिकल कॉलेज से महामारी विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र विश्नोई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम प्रभावित गांवों में पहुंची। टीम ने बच्चों की स्थिति, पानी की गुणवत्ता और पोषण संबंधी परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
पोषण की कमी और दूषित पानी पर विशेषज्ञों का फोकस
विशेषज्ञ टीम के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक बच्चों में कुपोषण और दूषित पानी बीमारी के प्रमुख संभावित कारण हो सकते हैं। पोषण की कमी के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से संक्रमण का खतरा बढ़ने की बात सामने आई है।
बीमारी से प्रभावित बच्चों में शुरुआत में शरीर पर दाने, तेज बुखार, मुंह में छाले, भूख न लगना और झटके आने जैसे लक्षण देखे गए। हालांकि, बीमारी की वास्तविक वजह और संक्रमण की प्रकृति की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
पुणे भेजे गए सैंपल, रिपोर्ट का इंतजार
बीमारी की सटीक पहचान के लिए बच्चों के सैंपल पुणे स्थित प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण के वास्तविक कारण और बीमारी की प्रकृति स्पष्ट हो सकेगी।
लगातार बच्चों के बीमार पड़ने से प्रभावित गांवों में दहशत का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए गांवों में स्वास्थ्य शिविर और अस्थायी अस्पताल शुरू किए हैं। स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर बीमार बच्चों और ग्रामीणों की जांच कर रही हैं।
47 बच्चे अस्पताल में, 51 स्वस्थ होकर लौटे
वर्तमान में 47 बच्चे बैहर और बालाघाट जिला अस्पतालों में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उपचार के बाद स्थिति में सुधार आने पर 51 बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने छह बच्चों की मौत की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट भोपाल भेज दी है।
पानी, पोषण और संक्रमण—तीनों मोर्चों पर जांच
प्रशासन ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती बढ़ा दी है। विशेषज्ञ बीमारी के कारणों का पता लगाने के साथ-साथ पेयजल स्रोतों, बच्चों के पोषण स्तर और संक्रमण की संभावित कड़ियों की जांच कर रहे हैं।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की नजर पुणे से आने वाली सैंपल रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट के आधार पर बीमारी की रोकथाम और प्रभावित क्षेत्रों में आगे की स्वास्थ्य रणनीति तय की जाएगी।