राजदीप सिंह सैनी
लुधियाना/यूटर्न/31 जुलाई। जनपथ एस्टेट के लोहा कारोबारी ने अपनी पत्नी, दो वर्करों और पांच जानकारों के साथ मिलकर अपने ही बड़े भाई की जाली वसीयत तैयार की। जिसके बाद उसकी प्रॉपर्टी अपने नाम ट्रांसफर करवा, फिर पत्नी के नाम ट्रांसफर करके बैंक में गिरवी रख दी। उक्त प्रॉपर्टी के आधार पर 10 करोड़ का लोन भी ले लिया। थाना साहनेवाल की पुलिस ने शास्त्री नगर की नैनसी जिंदल की शिकायत पर सिधवां के संजीव कुमार, न्यू कुंदनपुरी के हेमंत कुमार और सनव्यू एन्क्लेव के संजीव कौशल और जनपथ एस्टेट की कविता गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में रेड कर रही है। बताया जा रहा है कि सभी आरोपी घरों से फरार हो चुके है। पुलिस को दी शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी संजीव कुमार महिला कविता गुप्ता का पति है। जबकि हेमंत कुमार और संजीव कौशल उसके पास नौकरी करते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी संजीव कुमार उनके पिता अशोक कुमार का भाई है। उनके मुताबिक संजीव कुमार का लोहे का कारोबार है।
कोविड के दौरान हुई पिता की मौत
शिकायतकर्ता के अनुसार जुलाई 2021 में उनके पिता अशोक कुमार की मौत हो गई थी। उस समय कोविड का दौर चल रहा था। हालांकि मौत से पहले उनके पिता द्वारा कोई भी वसीयत नहीं तैयार करवाई गई थी। न ही प्रॉपर्टी किसी को ट्रांसफर की। कानून के मुताबिक उनकी मौत के बाद सारी प्रॉपर्टी उनके वारिसों को जानी बनती थी।
जाली वसीयत बना धोखे से प्रॉपर्टी अपने नाम करवाई
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जून 2021 में कोविड के दौरान सभी सरकारी ऑफिस बंद थे। लेकिन आरोपी संजीव कुमार द्वारा उस समय की एक वसीयत पेश की। जिसमें लिखा था कि उनके पिता अशोक कुमार ने एक वसीयत बनाकर ढंडारी कलां स्थित शुभ एन्क्लेव में पड़ी 1936 गज की प्रॉपर्टी उसके हिस्से में लिख दी है। वसीयत में गवाह अपने ही वर्कर संजीव कौशल और हेमंत को बना लिया। उसी वसीयत के आधार पर आरोपी संजीव कुमार ने प्रॉपर्टी माल महिकमे में अपने नाम करवा ली। जबकि वसीयत न तो सरकार से रजिस्टर्ड थी और न ही किसी काउंसलर और नंबरदार ने उसे वेरिफाई किया था।
फर्जी ट्रांसफर डीड के सहारे 10 करोड़ का लोन लिया
शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी संजीव कुमार ने अगस्त 2021 को उसे कचहरी यह कहकर बुलाया कि उसके पिता की प्रॉपर्टी को उनके मां के नाम पर ट्रांसफर करवाना है। जिसके बाद उसने धोखे से हस्ताक्षर करवा लिए। जिसके बाद संजीव कुमार ने पांच अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जाली वसीयत इस्तेमाल करके ट्रांसफर डीड अपनी पत्नी कविता गुप्ता के हक में करवा दी। उसी ट्रांसफर डीड के आधार पर कविता ने नगर निगम रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा लिया। जिसके बाद इसी फर्जी ट्रांसफर डीड के बल पर प्रॉपर्टी को टाटा कैपिटल फाइनेंस सर्विस के पास गिरवी रखकर 10 करोड़ का लोन भी ले लिया।
मुलाकात के दौरान शक होने पर हुआ खुलासा
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसका पति राहुल जिंदल संजीव कुमार को मिलने के लिए गए तो उन्हें हेरफेर की आशंका हुई। जिसके चलते शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2025 में उक्त प्रॉपर्टी का टीएस-1 लेने के लिए अप्लाई किया। जब निगम रिकॉर्ड चैक किया तो उन्हें जाली ट्रांसफर डीड, वसीयत और गवाही के बारे में पता चला। उन्होंने इस संबंधी संजीव और कविता से बात की तो वे टाल मटोल करने लगे। जिसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस को शिकायत दी।
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