सोसाइटी ने शोर-शराबे और पार्किंग को बताया वजह, पुलिस ने कहा सड़क बंद करवाना उनका अधिकार नहीं; मरीजों और एंबुलेंस की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांगी निष्पक्ष जांच।
लुधियाना )नवीन गोगना) : लुधियाना के टैगोर नगर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा सरकारी सड़क पर लगाए गए गेट को स्थायी रूप से बंद किए जाने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सोसाइटी के प्रतिनिधियों का दावा है कि उन्होंने यह गेट पुलिस प्रशासन की अनुमति से बंद किया है, लेकिन यदि ऐसा है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किस कानून के तहत सार्वजनिक सड़क को बंद करने की अनुमति दी गई?
यह सड़क केवल टैगोर नगर के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि डीएमसी अस्पताल (DMC) सहित शहर के कई बड़े और प्रतिष्ठित अस्पतालों तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। स्थानीय लोगों के अनुसार केवीएम रोड पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, ऐसे में कई बार एंबुलेंस इसी रास्ते से मरीजों को डीएमसी हार्ट सेंटर तथा अन्य अस्पतालों तक पहुंचाती हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग को स्थायी रूप से बंद कर देना मरीजों की जान के लिए भी खतरा बन सकता है।
मामले की पड़ताल करने जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची तो गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड से गेट खोलने का अनुरोध किया गया। गार्ड ने साफ शब्दों में कहा कि वह गेट नहीं खोल सकता। जब उससे पूछा गया कि गेट पर स्पष्ट रूप से रात 10:30 बजे बंद करने का समय लिखा है, जबकि शाम करीब 7 बजे ही गेट बंद कर दिया गया, तो उसने कहा कि वह इस बारे में कुछ नहीं बता सकता और सोसाइटी के पदाधिकारी चावला जी से बात करने की सलाह दी।
दिलचस्प बात यह रही कि गार्ड के पास स्वयं चावला जी का मोबाइल नंबर भी नहीं था। बाद में उसने अपनी सुरक्षा कंपनी के मैनेजर से नंबर लेकर मीडिया को उपलब्ध कराया।
फोन पर हुई बातचीत में चावला जी ने पहले कहा कि गेट शाम 7 बजे बंद नहीं किया गया। उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि करीब एक महीने से यह गेट स्थायी रूप से बंद रखा गया है।
जब उनसे पूछा गया कि यह एक सरकारी सड़क है और इसे स्थायी रूप से कैसे बंद किया जा सकता है, जबकि इसी रास्ते से पंजाब ही नहीं बल्कि देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों तक लोगों और एंबुलेंस की आवाजाही होती है, तो उन्होंने जवाब दिया कि कॉलोनी के बाहर लोग गाड़ियां खड़ी कर तेज आवाज में म्यूजिक बजाते हैं और इससे कॉलोनी के लोग परेशान होते हैं।
इस पर जब उनसे कहा गया कि कॉलोनी के बिल्कुल पास पुलिस कंट्रोल रूम मौजूद है और यदि कोई कानून व्यवस्था की समस्या है तो उसकी शिकायत पुलिस से की जानी चाहिए, तब चावला जी ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस प्रशासन से अनुमति लेकर ही गेट बंद किया है। मगर चंद कदम पर तैनात पुलिस चोंकी से सम्पर्क किया गया तो चोंकी इनचार्ज ने कहा पुलीस के पास सरकारी रास्ता बंद करवाने का क्या अधिकार है यह काम तो नगर निगम का है
उसी वक्त जब दूबारा चावला जी से बात कर पुलिस का जवाब बताया गया तो उन्हे कोई जवाब नही आया बस इतना कहते रहे की आप समझा करो मगर वह इस बार पुलिस प्रमीशन वाले पहले व्यान से बचते रहे
इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि यदि किसी गंभीर मरीज को एंबुलेंस के जरिए तुरंत अस्पताल पहुंचाना हो और रास्ता बंद मिले तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, तो उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि इस संबंध में कॉलोनी के काउंसलर से बात की जाए।
अब इस पूरे मामले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—
- यदि यह सड़क सरकारी है तो क्या किसी वेलफेयर सोसाइटी को इसे अपनी निजी सड़क घोषित कर स्थायी रूप से बंद करने का अधिकार है?
- यदि पुलिस प्रशासन ने वास्तव में अनुमति दी है तो वह किस कानून के तहत दी गई?
- क्या किसी सार्वजनिक मार्ग को केवल कॉलोनी की सुविधा के लिए बंद किया जा सकता है, जबकि उसी रास्ते से अस्पतालों और एंबुलेंस का आवागमन होता हो?
- यदि भविष्य में गेट बंद होने के कारण किसी मरीज की जान को खतरा पहुंचता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कॉलोनी में पार्किंग या शोर-शराबे की समस्या थी तो उसका समाधान पुलिस और प्रशासन के माध्यम से किया जाना चाहिए था, न कि सरकारी सड़क पर स्थायी ताला लगाकर उसे निजी रास्ते में बदल दिया जाए।
अब निगाहें जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाएगा कि सार्वजनिक सड़क पर स्थायी रूप से गेट बंद करना कानून सम्मत है या नहीं।