राजदीप सिंह सैनी
लुधियाना/यूटर्न/11 जुलाई। साइबर ठगों द्वारा ठगी मारने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। अब साइबर अपराधियों की और से ठगी करने के लिए कंपनियों के अकाउंटेंट्स को ही जरिया बनाना शुरु कर दिया गया है। दरअसल, कंपनियों के अकाउंटेंट का पहले व्हाट्सएप हैक किया जाता है, फिर एक फर्जी नंबर से मालिक के नाम का मैसेज अकाउंटेंट को भेजा जाता है। जिसके बाद अकाउंटेंट से धोखे के साथ मोटी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली जाती है। लुधियाना पंजाब की आर्थिक राजधानी है। कारोबारी शहर होने के चलते यहां पर ठगों द्वारा ज्यादा फोक्स किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों के दौरान लुधियाना में ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं। जिसमें एक ज्वेलर और डाइंग कारोबारी को शिकार बनाना का प्रयास किया गया। हालांकि पीड़ितों द्वारा समय रहते अलर्ट हो जाने पर उनका बचाव हो गया। लेकिन उनकी तरफ से इस संबंधी साइबर क्राइम सैल को शिकायत दी गई है। लेकिन इससे हर शहरवासी को अलर्ट होने की जरुरत है।
अकाउंटेंट का नंबर और व्हाट्सएप करते हैं हैक
दरअसल, साइबर ठगों द्वारा बड़े शातिर तरीके से वारदात की जाती है। उनकी तरफ से सबसे पहले कंपनियों की सर्च की जाती है। फिर उनके अकाउंटेंट के नंबर ढूंढे जाते हैं। उनके नंबर और व्हाट्सएप ऐप दोनों को हैक किया जाता है। फिर उक्त ऐप के जरिए पता लगाया जाता है कि अकाउंटेंट किस-किस से बात कर रहा है और उसके मालिक की जानकारी जुटाई जाती है। फिर वारदात की जाती है।
ऐप के जरिए मनमर्जी नाम व नंबर भरकर मैसेज भेजते हैं ठग
दरअसल, साइबर ठगों द्वारा कई आधुनिक ऐप इस्तेमाल की जाती है। जिसमें कुछ पेमेंट देकर अकाउंट बनाया जाता है। उक्त ऐप के जरिए मनमर्जी मोबाइल नंबर और मनमर्जी नाम भरा जा सकता है। ऐप जरिए अगर किसी को कॉल या मैसेज किया जाएगा, वहां ऐप में जो नाम और नंबर भरा होगा, वहीं दूसरे व्यक्ति को शो होगा। ऐसे करके ठगों द्वारा अकाउंटेंट द्वारा सेव किए मालिक के नंबर और नाम का इस्तेमाल कर उक्त ऐप के जरिए मैसेज भेजा जाता है। जिससे अकाउंटेंट को शक नहीं होता और ठगी होती है।
ज्वेलरी व्यापारी से 75 लाख की ठगी का प्रयास
चर्चा है कि शहर के एक ज्वेलरी व्यापारी से साइबर ठगों ने 75 लाख रुपए की ठगी करने का प्रयास किया। जिसमें ठगों द्वारा ज्वेलर के अकाउंटेंट पर मालिक के नाम से एक मैसेज भेजा। जिसमें एक अकाउंट नंबर देकर 75 लाख रुपए आरटीजीएस कराने को कहा। जब अकाउंटेंट ज्वेलर मालिक के हस्ताक्षर कराने आया तो उसने अचानक उक्त रकम के बारे में पूछ लिया। जिस पर अकाउंटेंट ने मैसेज दिखाया। जबकि वे मैसेज व्यापारी ने नहीं भेजा था। जिससे ठगी से बचाव हो गया।
डाइंग व्यापारी से दो करोड़ की ठगी की कोशिश
इसी तरह शहर के एक डाइंग व कपड़ा व्यापारी से दो करोड़ की ठगी की कोशिश की गई। पहले मामले की तरह ठगों ने व्यापारी के अकाउंटेंट को मैसेज भेजा और 2 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने को कहा। अकाउंटेंट ने पूरी तैयारी कर हस्ताक्षर के लिए मालिक के पास डिटेल भेजी। मालिक बाहर टूर पर होने के कारण हस्ताक्षर नहीं कर पाए। जिससे 3-4 दिन पड़ गए। फिर जब मालिक वापिस आया तो उसने 2 करोड़ की कोई भी रकम ट्रांसफर करने के आदेश न देने की बात कही। जिससे ठगी का पता चला।
ह्यूमन साइकॉलोजी के साथ कर रहे खेल
दरअसल, ह्यूमन साइकॉलोजी का इस्तेमाल कर साइबर ठग फ्रॉड करते हैं। अब किसी के मोबाइल में कोई नंबर सेव हो और उसी नंबर के सेव किए नाम का हूबहू नाम का मैसेज आने पर कोई शक नहीं कर पाता। जिसके चलते कोई नंबर चैक नहीं करता। अकाउंटेंट भी उसे मालिक का समझ लेते हैं। इस तरह ठगी हो जाती है।
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