पीपुल्स फोरम ने उठाए सवाल, अलगाववादी नेताओं को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताए जाने पर जांच और कार्रवाई की मांग
जम्मू (Narendra Singh Danu) : जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजी गई एक पुस्तक को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने आरोप लगाया है कि ‘जम्मू-कश्मीर की महान व दिग्गज हस्तियां’ नामक पुस्तक में आतंकी मकबूल बट का महिमामंडन किया गया है, जबकि कई अलगाववादी नेताओं को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। फोरम ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और पुस्तक की खरीद प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजी गई पुस्तक
फोरम के अनुसार, यह पुस्तक समग्र शिक्षा योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए खरीदी गई और जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में उपलब्ध कराई गई। पुस्तक का प्रकाशन निजी प्रकाशक ओबराय बुक्स सर्विस ने किया है, जबकि इसके लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीणा हैं।
मकबूल बट और अलगाववादी नेताओं पर आपत्ति
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम के उपाध्यक्ष रघु मेहता और ट्रस्टी दीपक कपूर ने पत्रकार वार्ता में दावा किया कि पुस्तक में मकबूल बट को ‘शहीद-ए-आजम’ बताया गया है। साथ ही सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम, मीरवाइज उमर फारूक और मौलवी फारूक जैसे अलगाववादी नेताओं का उल्लेख ‘कश्मीर के स्वतंत्रता सेनानियों’ के रूप में किया गया है।
फोरम का आरोप है कि पुस्तक में ऐसे विवरण शामिल हैं जिनमें भारत को ‘आक्रांता’ बताया गया है और मकबूल बट को कश्मीर की आजादी के लिए बलिदान देने वाला बताया गया है।
1984 में दी गई थी फांसी
मकबूल बट को सीआईडी इंस्पेक्टर अमर चंद और एक भारतीय राजनयिक की हत्या से जुड़े मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी। फोरम का कहना है कि ऐसे व्यक्ति का महिमामंडन कर छात्रों के सामने प्रस्तुत करना गंभीर विषय है।
जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
पीपुल्स फोरम ने राज्य सरकार से मांग की है कि पुस्तक की सामग्री, उसकी खरीद प्रक्रिया और उसे सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने की पूरी जांच कराई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों या संस्थाओं की भूमिका इसमें रही है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस मामले पर सरकार या समग्र शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।