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राजस्थान के पचपदरा में बने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन; जोधपुर एयरपोर्ट टर्मिनल का भी लोकार्पण, जयपुर मेट्रो फेज-2 समेत कई परियोजनाओं की देंगे सौगात
जयपुर (Narendra Singh Danu) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में भारत की पहली ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स राष्ट्र को समर्पित करेंगे। करीब 79,459 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना देश के पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल मानी जा रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री जोधपुर में नए सिविल एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद पचपदरा पहुंचकर रिफाइनरी का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम के दौरान वह जयपुर मेट्रो फेज-2 समेत राज्य की कई विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे तथा विभिन्न सरकारी विभागों में चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपेंगे। 9 MMTPA क्षमता, 2.4 MMTPA पेट्रोकेमिकल उत्पादन हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित इस रिफाइनरी की 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) रिफाइनिंग क्षमता है। साथ ही इसमें 2.4 MMTPA पेट्रोकेमिकल उत्पादन की सुविधा भी विकसित की गई है। रिफाइनरी में कच्चे तेल से विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन शुरू हो चुका है। वैश्विक स्तर की अत्याधुनिक तकनीक रिफाइनरी को राजस्थान और आयातित क्रूड ऑयल के मिश्रण की प्रोसेसिंग के लिए आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है। इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है, जो इसे दुनिया की सबसे उन्नत रिफाइनरियों में शामिल करता है। परियोजना में 26 प्रतिशत से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता विकसित की गई है। उद्योग और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साथ पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी। इसके आधार पर पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक पार्क विकसित होंगे, जिससे एमएसएमई, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और एग्री-फिल्म्स जैसे उद्योगों को नई गति मिलेगी। निर्माण कार्य के दौरान करीब 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, जबकि सहायक क्षेत्रों में लगभग एक लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए। निर्माण के रिकॉर्ड 1.5 करोड़ घन मीटर मिट्टी हटाई गई, जो गीजा के पिरामिड से लगभग 6 गुना अधिक है। 16 लाख घन मीटर कंक्रीट का उपयोग हुआ, जो बुर्ज खलीफा से करीब 5 गुना ज्यादा है। 3 लाख मीट्रिक टन स्टील लगाया गया, जो एफिल टॉवर में इस्तेमाल स्टील से लगभग 40 गुना अधिक है। 28 हजार किलोमीटर लंबी केबल बिछाई गई। रिफाइनरी में 125 मीटर ऊंचा कोक डोम स्थापित किया गया है, जो अपनी तरह की सबसे बड़ी संरचनाओं में शामिल है। यह परियोजना राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के ऊर्जा और औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाने वाली आधारभूत परियोजना मानी जा रही है।