अयोध्या/यूटर्न/19 जून। अयोध्या में राम मंदिर के डोनेशन फंड को लेकर चल रहे विवाद के केंद्र में 'पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर' (तीर्थयात्री सुविधा केंद्र) है। मुख्य मंदिर से लगभग 200 मीटर दूर स्थित इस इमारत के बेसमेंट में पैसे गिनने का कमरा है। मंदिर परिसर में लगे लगभग 35 डोनेशन बॉक्स से इकट्ठा किया गया पैसा इसी कमरे में लाया और गिना जाता है। रोज़ाना लगभग एक लाख भक्तों के मंदिर आने के कारण, पैसे गिनने का काम दो शिफ्ट में होता है, सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक और हर शिफ्ट में लगभग 20 टेलर (पैसे गिनने वाले कर्मचारी) काम करते हैं। रोज़ाना डोनेशन का अनुमान 8 से 13 लाख रुपये के बीच है। लेकिन, राम जन्मभूमि क्षेत्र तीर्थ ट्रस्ट के उस कर्मचारी के अनुसार, जो पैसे गिनने वाले कमरे में तैनात है, कुछ दिन ऐसे भी होते हैं जब यह रकम 50 से 60 लाख रुपये तक पहुँच जाती है।
एसआईटी कर चूकी पूछताछ
यह कर्मचारी उन लोगों में शामिल है जिनसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने पूछताछ की है। एसआईटी इन आरोपों की जाँच कर रही है कि भक्तों द्वारा दान किए गए सोने, चाँदी और हीरे के गहनों को नकली चीज़ों से बदल दिया गया और मंदिर के कलेक्शन से पैसे भी चोरी किए गए। एसआईटी ग्रीन हाउस में तैनात है, जो मंदिर के पास ही स्थित है। टीम रिकॉर्ड, पैसे गिनने की प्रक्रिया, बही-खाते और फंड जमा करने के तरीके की जाँच कर रही है, साथ ही डोनेशन मैनेज करने और अकाउंट्स का हिसाब-किताब रखने वाले अधिकारियों से भी बात कर रही है।
अगले हफ्ते तक फाइनल रिपोर्ट आने की उम्मीद
सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट एक-दो दिन में और फाइनल रिपोर्ट अगले हफ़्ते आने की उम्मीद है। पुलिस को अभी तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। इस विवाद के बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार दोपहर अयोध्या का दौरा करेंगे। वे मंदिर जाने के अलावा रामायण वैक्स म्यूज़ियम और म्युनिसिपल ज़ोनल ऑफिस का उद्घाटन भी करेंगे।
फंड इकट्ठा करने की प्रक्रिया अलग
राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर बनाने के लिए जो फंड इकट्ठा किया गया था, वह पूरी तरह से अलग प्रक्रिया थी। उस समय इकट्ठा किए गए लगभग 3,500 करोड़ रुपये अलग से जमा किए गए थे और उनका हिसाब-किताब भी अलग से रखा गया था। काउंटिंग सेंटर के स्टाफ़ के अलावा, राम जन्मभूमि क्षेत्र तीर्थ ट्रस्ट हज़ारों लोगों को रोज़गार भी देता है, जिनमें सिक्योरिटी गार्ड, रसोइए और सफ़ाई कर्मचारी शामिल हैं। स्टाफ़ में लगभग 40 पूर्व सैनिक भी हैं।
संघ की चिंता
संगठन के भीतर इन गंभीर आरोपों को लेकर चिंता थी, खासकर इसलिए क्योंकि राम जन्मभूमि क्षेत्र तीर्थ ट्रस्ट के मैनेजमेंट और रोज़मर्रा के कामकाज से जुड़े कई लोगों के RSS से पुराने संबंध रहे हैं। इस विवाद ने ट्रस्ट के एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े लोगों पर सवालिया निशान लगा दिया है, जिनमें रोज़मर्रा की गतिविधियों, फ़ाइनेंस और स्टाफ़ की भर्ती के लिए ज़िम्मेदार अधिकारी भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट से जुड़े अहम पदाधिकारियों का RSS से जुड़ा होना संघ की इस चिंता को और बढ़ा रहा है कि इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच सकता है।
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